रायपुर। कांग्रेस पार्टी ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के बाद मतदाता सूची में भारी हेरफेर को लेकर गंभीर चिंताएं उठाई हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि इन चिंताओं को राहुल गांधी ने 7 अगस्त 2025 को एआईसीसी मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान और भी स्पष्ट रूप से रखा, जहाँ उन्होंने मतदाता सूचियों में भयानक अनियमितताओं का खुलासा किया। उनके खुलासे इस बात की ओर इशारा करते हैं कि किस हद तक और कितनी सटीकता से चुनावी धोखाधड़ी की जा रही है - वह भी भारत के चुनाव आयोग की नाक के नीचे। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि राहुल गांधी द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य बेंगलुरु सेंट्रल लोकसभा क्षेत्र की स्वतंत्र जांच पर आधारित हैं, जहाँ 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी को अप्रत्याशित हार का सामना करना पड़ा। इस क्षेत्र में कांग्रेस 7 में से 6 विधानसभा क्षेत्रों में विजयी रही, जबकि भाजपा केवल एक विधानसभा क्षेत्र महादेवपुरा में भारी बहुमत से जीती और इसी के आधार पर उसे लोकसभा सीट मिल गई। अब यह सामने आया है कि केवल इस एक विधानसभा क्षेत्र में ही 1,00,250 वोटों के साथ धांधली की गई।
महादेवपुरा में मतदाता सूची में की गई हेराफेरी मुख्यतः पाँच तरीकों से की गई
1. डुप्लीकेट मतदाता - एक ही व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में कई बार दर्ज। कुल 11,965 डुप्लीकेट नाम मिले।
2. फर्ज़ी पते - पता या तो है ही नहीं या “0” जैसा कुछ दर्ज है। कुल 40,009 मतदाता फर्ज़ी पते पर पंजीकृत थे।
3. एक ही पते पर बड़ी संख्या में मतदाता - 10,452 मतदाता ऐसे एक ही पते पर दर्ज हैं जहाँ बड़ी संख्या में लोगों का नाम है।
4. अवैध फ़ोटोग्राफ़- अत्यधिक धुंधली या बहुत छोटी फोटो। कुल 4,132 प्रविष्टियाँ ऐसी थीं।
5. फॉर्म 6 का दुरुपयोग - जो पहली बार मतदाता बनने वालों के लिए होता है, उसका दुरुपयोग कर 33,692 फर्जी नाम जोड़े गए।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि इन आँकड़ों से भी ज़्यादा गंभीर बात यह है कि इन प्रविष्टियों को देखकर साफ़ पता चलता है कि भारत के चुनाव आयोग द्वारा निष्पक्ष चुनाव के नाम पर कैसी भयानक लापरवाही की जा रही है। उदाहरण के तौर पर, गुरकीरत सिंह डंग नामक व्यक्ति एक ही विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में चार बार अलग-अलग ईपीआईसी आईडी से दर्ज है। आदित्य श्रीवास्तव नामक मतदाता महादेवपुरा, मुंबई और लखनऊ तीनों स्थानों में एक ही ईपीआईसी आईडी से पंजीकृत है। हजारों प्रविष्टियों में पता “0”, “-” या कोई अस्तित्वहीन नाम दिया गया है। एक छोटे से कमरे में 80 मतदाता दर्ज हैं, और ज़मीनी सत्यापन में पाया गया कि वहाँ कोई भी व्यक्ति मौजूद नहीं था।
हमारी टीम ने सात फीट ऊँची फाइलों को हाथ से खंगाल कर यह जानकारी एकत्र की। निष्कर्ष यह है कि यदि केवल महादेवपुरा को हटा दिया जाए, तो कांग्रेस प्रत्याशी मंसूर अली ख़ान, भाजपा के पी.सी. मोहन को बेंगलुरु सेंट्रल लोकसभा सीट पर 82,000 वोटों से हरा देते। लेकिन महादेवपुरा में हुए 1,00,250 वोटों की चोरी के कारण भाजपा यह सीट 32,707 वोटों से जीत गई। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि यदि इसे राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में देखा जाए तो स्थिति और भी भयावह है। 2024 के हरियाणा विधानसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी को केवल 22,779 वोटों के अंतर से 8 सीटों पर हार का सामना करना पड़ा, जिससे भाजपा को बहुत कम बहुमत से सरकार बनाने का मौका मिल गया। महाराष्ट्र में 2024 के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले 5 महीनों में मतदाता सूची में उतने नए मतदाता जोड़े गए जितने पिछले 5 वर्षों में भी नहीं जोड़े गए थे कृ लगभग 41 लाख नए नाम जुड़ गए। इससे मतदाता संख्या राज्य की वयस्क जनसंख्या से भी अधिक हो गई। मतदान के दिन शाम 5 बजे के बाद अचानक वोटिंग प्रतिशत में अस्वाभाविक उछाल देखा गया। ये सभी घटनाएं एक व्यवस्थित चुनावी हेरफेर की ओर इशारा करती हैं।
2024 के लोकसभा चुनावों में भाजपा ने 25 ऐसी सीटें जीतीं जहाँ जीत का अंतर 33,000 से कम था कृ और सत्ता में बने रहने के लिए भी भाजपा को सिर्फ़ 25 सीटों की ज़रूरत थी। अतः राहुल गांधी द्वारा उठाए गए सवालों को अलग-थलग नहीं देखा जा सकता। यह भारत में चुनावों की वैधता और लोकतंत्र के स्वास्थ्य से जुड़े हुए हैं।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने इन मुद्दों को कई बार चुनाव आयोग के सामने उठाया है। राहुल गांधी ने 3 फरवरी, 10 मार्च को संसद में यह मुद्दा उठाया और 7 जून 2025 को विभिन्न समाचार पत्रों में एक लेख भी लिखा। 7 फरवरी को इंडिया गठबंधन की एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस भी हुई थी और कांग्रेस पार्टी ने चुनाव आयोग को चार औपचारिक पत्र लिखकर डिजिटल मतदाता सूची और संबंधित डेटा उपलब्ध कराने की माँग की थी। लेकिन चुनाव आयोग ने सहयोग करने के बजाय सच्चाई को दबाने का प्रयास किया। आयोग ने सीसीटीवी फुटेज की सार्वजनिक पहुंच को प्रतिबंधित करने के लिए नियम बदल दिए और यहां तक कि 45 दिनों के भीतर वीडियो सबूत नष्ट करने का आदेश भी जारी किया। हमने महाराष्ट्र की मशीन-पठनीय मतदाता सूची की माँग की, लेकिन आयोग ने इसे “अस्वीकार्य” बताकर ठुकरा दिया।
अब यह स्पष्ट हो गया है कि चुनाव आयोग जानबूझकर मतदाता सूची को ऐसे प्रारूप में उपलब्ध कराता है जिसे मशीन से पढ़ा न जा सके। वह ठीक उसी प्रकार की प्रणालीगत जाँच से बचना चाहता है जिसे हम कर रहे हैं। आयोग जानता है कि उसने भारत के चुनावों से समझौता किया है और वह भयभीत है कि कांग्रेस पार्टी देश की जनता के सामने क्या उजागर कर सकती है। इसी कारण से चुनाव आयोग ने विपक्ष के प्रति दुराग्रह अपनाया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया भी इसी प्रवृत्ति का हिस्सा है। कर्नाटक और महाराष्ट्र राज्य चुनाव आयोगों ने विपक्ष के नेता से हलफ़नामे के साथ दस्तावेज़ी प्रमाण माँगे हैं। इस प्रक्रिया में, वे यह स्वीकार करने से इंकार कर रहे हैं कि अब जबकि राहुल गांधी ने पुख्ता सबूत पेश कर दिए हैं, प्रमाण देने का दायित्व विपक्ष पर नहीं बल्कि चुनाव आयोग पर है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि चुनाव आयोग यदि अपनी निष्पक्षता को प्रमाणित करना और अपनी विश्वसनीयता को पुनःस्थापित करना चाहता है, तो उसे दो स्पष्ट माँगों पर तत्काल कार्रवाई करनी होगीः
1. चुनाव आयोग को मशीन-पठनीय मतदाता डेटा तत्काल सार्वजनिक करना चाहिए।
2. चुनावी प्रक्रिया से जुड़ी सीसीटीवी फुटेज को सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
साथ ही चुनाव आयोग राहुल गांधी के उठाये सवालों का जवाब दे। विपक्ष ने अपना काम कर दिया है। अब यह चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है कि वह देश की जनता के सामने सच्चाई रखे और हमारे लोकतंत्र में लोगों का विश्वास फिर से कायम करे।