रातों-रात हो रही निजी बोरिंग, पुलिस-प्रशासन की मिलीभगत से कलेक्टर का आदेश ध्वस्त
जल अभावग्रस्त घोषित जिले में प्रतिबंध के बावजूद 
सिहोरा
सिहोरा-मझौली में धड़ल्ले से चल रहीं बोरिंग मशीनें
सिहोरा। जबलपुर कलेक्टर द्वारा 18 अप्रैल को जिले को जल अभावग्रस्त घोषित करते हुए 30 जून तक निजी बोरिंग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के आदेश जारी किए गए थे, लेकिन सिहोरा और मझौली तहसील में यह आदेश पूरी तरह बेअसर साबित हो रहा है। आरोप है कि पुलिस और प्रशासन की मिलीभगत से रातों-रात निजी बोरिंग कराई जा रही हैं, जबकि जिम्मेदार अधिकारी मूकदर्शक बने हुए हैं।
नगर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों और घरों में लगातार बोरिंग मशीनें चल रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि देर रात तक मशीनों की आवाज सुनाई देती है, लेकिन प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं करता। सूत्रों के अनुसार कई जगहों पर बोरिंग मशीन संचालकों से मोटी रकम लेकर उन्हें संरक्षण दिया जा रहा है। आरोप यह भी हैं कि कुछ थानों की पुलिस की सहमति के बिना यह काम संभव नहीं है।
भीषण गर्मी के चलते सिहोरा और मझौली क्षेत्र पहले ही गंभीर जल संकट से जूझ रहे हैं। नगर और ग्रामीण क्षेत्रों में जलस्तर लगातार नीचे जा रहा है, जिससे लोगों को पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद अवैध बोरिंग पर रोक नहीं लगना प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है।
खास बातें
30 जून तक निजी बोरिंग पर प्रतिबंध लागू
रात में चल रहीं बोरिंग मशीनें
पुलिस-प्रशासन की मिलीभगत के आरोप
गिरते भू-जल स्तर से बढ़ा जल संकट
जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई से बच रहे