बिलासपुर/नागपुर। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के नागपुर रेल मंडल ने साल 2025 में यात्री सुरक्षा और सुविधाओं के मामले में बड़ी कामयाबी हासिल की है। मंडल रेल प्रबंधक (DRM) दीपक कुमार गुप्ता की देखरेख में इंजीनियरिंग विभाग ने इस साल न केवल पुराने रेलवे ट्रैक बदले, बल्कि ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने के लिए आधुनिक मशीनों और सॉफ्टवेयर का भी जमकर इस्तेमाल किया। पूरे साल विभाग का जोर इस बात पर रहा कि पटरियों की निगरानी चौबीसों घंटे हो ताकि हादसों की गुंजाइश खत्म की जा सके।
जीपीएस से हो रही पेट्रोलमैन की निगरानी
पटरियों की सुरक्षा के लिए तैनात पेट्रोलमैन अब कहां हैं और क्या काम कर रहे हैं, इसकी लाइव जानकारी रेलवे के पास रहती है। मंडल ने जीपीएस आधारित सिस्टम लागू किया है। डीआरएम दीपक कुमार गुप्ता ने बताया कि अब एक नया सॉफ्टवेयर बनाया गया है जो तुरंत अलर्ट भेज देता है अगर कोई पेट्रोलमैन ठंड के समय पटरियों की जांच के दौरान 15 या 30 मिनट से ज्यादा एक जगह रुकता है। इससे रात के समय होने वाली गश्त और ज्यादा मजबूत हो गई है।

मशीनों से हुआ काम, बची मेहनत और समय
इस साल पहली बार प्लेटफॉर्म की लाइनों को सुधारने के लिए पीक्यूआरएस और बीसीएम जैसी भारी मशीनों का इस्तेमाल किया गया। इससे काम जल्दी हुआ और रेल गाड़ियां ज्यादा समय तक नहीं रोकनी पड़ीं। गोंदिया से चांदाफोर्ट के बीच करीब 88 किलोमीटर लंबी पटरी को पूरी तरह नया किया गया है। वहीं डूमरी खुर्द यार्ड के सुधार का काम भी रिकॉर्ड समय में पूरा कर लिया गया।
कम हुए फाटक, बढ़ाए गए फुट ओवर ब्रिज
सुरक्षा को देखते हुए रेलवे ने इस साल 14 रेलवे फाटकों को हमेशा के लिए बंद कर दिया है। इनकी जगह अब रोड ओवर ब्रिज या अंडरब्रिज बना दिए गए हैं ताकि लोग बिना जान जोखिम में डाले पटरी पार कर सकें। केलोड स्टेशन पर यात्रियों के लिए नया फुट ओवर ब्रिज भी शुरू किया गया है। इसके अलावा डोंगरगढ़ स्टेशन पर नई लाइनों के बनने से ट्रेनों के आने-जाने में होने वाली देरी अब कम होगी।