सिहोरा जिला आंदोलन में शामिल होने के आरोप में शिक्षक नरेन्द्र त्रिपाठी की प्रतिनियुक्ति समाप्त
सिहोरा
सिहोरा को जिला बनाए जाने की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच एक बार फिर प्रशासनिक कार्रवाई चर्चा का विषय बन गई है। शिक्षक नरेन्द्र त्रिपाठी को जन शिक्षक पद से हटाए जाने की कार्यवाही की गई है।
आरोप है कि 09 दिसंबर 2025 को सिहोरा में जिला बनाए जाने की मांग को लेकर हुए आंदोलन के दौरान शिक्षक नरेन्द्र त्रिपाठी ने भाषण दिया था। इस संबंध में एसडीएम सिहोरा द्वारा शासन को रिपोर्ट भेजी गई। रिपोर्ट के आधार पर 11 दिसंबर 2025 को कलेक्टर द्वारा उनकी मझौली के जन शिक्षा केंद्र बरगी से प्रतिनियुक्ति समाप्त कर दी गई।
इस कार्रवाई के विरोध में श्री त्रिपाठी ने मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय में अपील दायर की। न्यायालय ने कलेक्टर जबलपुर को एक माह के भीतर शिक्षक के अभ्यावेदन पर निर्णय लेने का निर्देश दिया। इसके बाद एक बार फिर 25.02.26 को राघवेंद्र सिंह (कलेक्टर, जबलपुर) ने जिला शिक्षा अधिकारी घनश्याम सोनी की रिपोर्ट के आधार पर नरेन्द्र त्रिपाठी की जन शिक्षक पद से प्रतिनियुक्ति समाप्त कर उन्हें जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय जबलपुर भेजने की कार्यवाही की।
विदित हो कि इससे पूर्व भी लगभग दो वर्ष पहले सिहोरा जिला आंदोलन में संलिप्तता के आरोप में शिक्षक नरेन्द्र त्रिपाठी का प्रशासनिक स्थानांतरण छिंदवाड़ा जिले के परासिया कर दिया गया था। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा है कि दोनों ही कार्रवाइयाँ राजनीतिक दबाव में की गई हैं, हालांकि प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
तत्संबंध में शिक्षक नरेन्द्र त्रिपाठी ने कहा कि उनका “शरीर का रोम-रोम सिहोरा के प्रति समर्पित है” और यदि वे आत्मा से सिहोरा को जिला बनते देखना चाहते हैं तो इसमें क्या गलत है?लिखित जवाब में उन्होंने बताया कि वे सिहोरा के स्थानीय निवासी है उन्हे समस्त सिहोरा वासियों की भांति जिला आंदोलन की जानकारी है।शिक्षक ने दावा किया कि उनके द्वारा जन शिक्षक पद के किसी भी कार्य में कोई लापरवाही नहीं की गई है।सिहोरा को जिला बनाए जाने की मांग को लेकर क्षेत्र में समय-समय पर आंदोलन होते रहे हैं। अब इस प्रकरण ने आंदोलन को एक नया मोड़ दे दिया है।