बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की सबसे चर्चित स्वामी आत्मानंद स्कूल योजना अब सियासत की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। पूर्व विधायक शैलेष पांडेय ने भाजपा सरकार पर हमला बोलते हुए कहा है कि सरकार इस योजना की लोकप्रियता से डरी हुई है। बिलासपुर में नर्सरी के बच्चों की पढ़ाई बंद होने पर उन्होंने कलेक्टर और शिक्षा विभाग के रवैये पर भी सवाल उठाए हैं। पांडेय का आरोप है कि सरकार जानबूझकर इन स्कूलों को बंद करने का षडयंत्र रच रही है ताकि गरीब बच्चों को मिलने वाली मुफ्त और अच्छी शिक्षा का रास्ता रोका जा सके।
डीएमएफ तो केवल का बहाना
शैलेष पांडेय ने सीधे शब्दों में कहा कि बिलासपुर के आत्मानंद स्कूलों में नर्सरी के सिर्फ दो सौ बच्चे पढ़ते हैं और उन्हें पढ़ाने वाले शिक्षकों की संख्या केवल आठ है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि क्या सरकार इतनी गरीब हो गई है कि वह आठ शिक्षकों का वेतन नहीं दे सकती। अगर डीएमएफ के नियम बदल गए थे तो संविदा फंड या किसी दूसरे मद से पैसा दिया जा सकता था। पांडेय ने आरोप लगाया कि बिलासपुर कलेक्टर ने भी इस मामले में कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखाई और वह भी सरकार की लाइन पर ही काम कर रहे हैं।
गरीब बच्चों के भविष्य से खिलवाड़
कांग्रेस नेता ने कहा कि आत्मानंद योजना उन परिवारों के लिए एक बड़ा सहारा थी जो महंगे प्राइवेट स्कूलों की फीस नहीं भर सकते थे। अब नर्सरी क्लास बंद कर सरकार ने सीधे तौर पर मासूमों के भविष्य पर वार किया है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने अपना ढर्रा नहीं बदला तो गरीब बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा पूरी तरह बर्बाद हो जाएगी। सरकार का यह कदम साफ दिखाता है कि उसे गरीबों की शिक्षा से कोई सरोकार नहीं है।
शैलेश पांडेय का कहना है कि कलेक्टर को खुद सरकार से बात करनी चाहिए थी और विशेष फंड की व्यवस्था कर बच्चों की पढ़ाई जारी रखनी चाहिए थी। उन्होंने मांग की है कि सरकार अपनी जिद छोड़े और मासूमों के हित में इन बंद हुई कक्षाओं को तुरंत दोबारा शुरू कराए।