शिव मंदिर बाबाताल में देवी भागवत के दूसरे दिन उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
सिहोरा
स्थानीय बाबाताल स्थित प्राचीन शिव मंदिर परिसर में आयोजित नौ दिवसीय श्रीमद् देवी भागवत महापुराण कथा के द्वितीय दिवस पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। कथा व्यास पंडित इंद्रमणि त्रिपाठी ने देवी भागवत के माहात्म्य, श्रीशुकदेव जन्म चरित्र एवं पतित पावनी मां गंगा के धराधाम पर अवतरण की भावपूर्ण कथा का रसपान कराया।
कथा की शुरुआत में पं. त्रिपाठी ने देवी भागवत के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह ग्रंथ नहीं, बल्कि साक्षात भगवती का स्वरूप है। कलयुग के अशांत वातावरण में मानसिक शांति और मोक्ष प्राप्ति के लिए मां जगदंबा की शरण ही श्रेष्ठ मार्ग है। निष्काम भाव से कथा श्रवण करने से जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं।
द्वितीय दिवस के मुख्य प्रसंग में श्रीशुकदेव जी के अलौकिक जन्म और उनके महान वैराग्य का वर्णन किया गया। उन्होंने बताया कि शुकदेव जी जन्म से ही पूर्ण ज्ञानी थे और उनके जीवन से वैराग्य व भक्ति की प्रेरणा मिलती है। इसके बाद मां गंगा के अवतरण की कथा सुनाई गई, जिसमें राजा भगीरथ की तपस्या और लोककल्याण का संदेश दिया गया।
प्रवचन के दौरान भजनों पर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। अंत में मां जगदंबा की आरती एवं प्रसाद वितरण किया गया। इस अवसर पर मंदिर समिति के सदस्य व क्षेत्र के गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।