डीपीएस स्कूल बिलासपुर में चौथी कक्षा के छात्र हैं नन्हे अद्विक मिश्रा।
महज 8-9 साल की उम्र में अपनी पहल से लगा चुके हैं 1500 से 2000 तक पौधे।
राजधानी रायपुर में बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने किया सम्मानित।
रायपुर/बिलासपुर। कहते हैं कि हुनर, जज्बे और कुछ कर गुजरने की कोई उम्र नहीं होती। इस बात को सौ फीसदी सच कर दिखाया है बिलासपुर के रहने वाले महज 8-9 साल के नन्हे पर्यावरण योद्धा अद्विक मिश्रा ने। जिस उम्र में बच्चे मोबाइल गेम्स और टीवी में अपना समय बिताते हैं, उस उम्र में अद्विक धरती को हरा-भरा करने के एक महान मिशन पर निकले हुए हैं। पर्यावरण संरक्षण के प्रति उनके इसी असाधारण जुनून को देखते हुए कल राजधानी रायपुर में उन्हें 'पर्यावरण प्रेमी' के विशेष सम्मान से नवाजा गया।
कक्षा 1 से ही शुरू कर दिया था पौधरोपण
बिलासपुर के रिंग रोड नंबर 2 निवासी दीपक मिश्रा के सुपुत्र अद्विक मिश्रा वर्तमान में डीपीएस (DPS) स्कूल, बिलासपुर में कक्षा चौथी के छात्र हैं। अद्विक का पेड़ों के प्रति प्रेम कोई नया नहीं है। जब वह महज पहली या दूसरी कक्षा में पढ़ते थे, तभी से उन्हें प्रकृति से गहरा लगाव हो गया था। शुरुआत में उन्होंने अपने घर के आसपास और खाली जगहों पर फलदार और फूल वाले पौधे लगाना शुरू किया। धीरे-धीरे उनका यह शौक पर्यावरण को बचाने के एक बड़े संकल्प में बदल गया।
अकेले लगा चुके हैं 1500 से अधिक पेड़
अद्विक की मेहनत और लगन का ही नतीजा है कि वे अब तक अकेले और अपनी व्यक्तिगत पहल के दम पर 1500 से 2000 पेड़-पौधे लगा चुके हैं। वे न सिर्फ पौधे लगाते हैं, बल्कि एक सच्चे अभिभावक की तरह उनकी देखभाल भी करते हैं। स्कूल की छुट्टियों या खाली समय में अद्विक पौधे लगाने की जगहें तलाशते हैं और अपने नन्हे हाथों से इस धरती का श्रृंगार करते हैं।
बाल संरक्षण आयोग ने किया सम्मानित
इस नन्हे पर्यावरण योद्धा की गूंज बिलासपुर से निकलकर राजधानी रायपुर तक पहुंच गई है। कल रायपुर में आयोजित एक गरिमामय कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ राज्य बाल संरक्षण आयोग द्वारा अद्विक के इन निस्वार्थ प्रयासों को मंच पर सराहा गया। आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने अद्विक को उनके इस उत्कृष्ट कार्य के लिए 'पर्यावरण प्रेमी' के रूप में सम्मानित किया।
डॉ. वर्णिका शर्मा ने इस अवसर पर कहा कि अद्विक जैसे बच्चे हमारे राज्य और पूरे देश का भविष्य हैं। उनका यह कदम उन तमाम वयस्कों के लिए भी एक बड़ा सबक है जो पर्यावरण संरक्षण की केवल बातें करते हैं। अद्विक ने जमीन पर उतरकर यह दिखा दिया है कि एक छोटी सी उम्र का बच्चा भी ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन जैसी बड़ी समस्याओं से लड़ने में अपना अहम योगदान दे सकता है।