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सिहोरा जिला के लिए चप्पा–चप्पा बंद हजारों सिहोरा वासी सड़क पर

09 Dec 2025 | प्रशांत बाजपेई | 1756 views
सिहोरा जिला के लिए चप्पा–चप्पा बंद हजारों सिहोरा वासी सड़क पर

सिहोरा जिला के लिए चप्पा–चप्पा बंद


हजारों सिहोरा वासी सड़क पर, आमरण सत्याग्रह से उबाल पर आंदोलन


सिहोरा


सिहोरा को जिला बनाए जाने की मांग को लेकर आंदोलन अब अपने सबसे निर्णायक और संवेदनशील दौर में पहुंच गया है। अन्न त्याग कर चुके प्रमोद साहू ने आज जल का भी त्याग करते हुए आमरण सत्याग्रह की विधिवत शुरुआत कर दी। जैसे ही वे मंच पर पहुंचे, उनके गिरते स्वास्थ्य की स्थिति को देखकर मौजूद जनसमूह में जबरदस्त आक्रोश फैल गया।


प्रमोद साहू का कमजोर शरीर, लड़खड़ाता कदम और चेहरे पर साफ झलकती पीड़ा ने जनता को झकझोर कर रख दिया। मंच के सामने मौजूद लोग भावुक भी दिखे और आक्रोशित भी। लोगों का कहना था कि एक शांतिपूर्ण सत्याग्रही को इस हालत तक पहुंचने देना शासन की संवेदनहीनता को दर्शाता है।


इधर, पूरे सिहोरा में चप्पा–चप्पा बंद का नजारा देखने को मिला। हजारों की संख्या में सिहोरा वासी सड़कों पर उतर आए। बाजार बंद रहे, यातायात प्रभावित रहा और पूरा शहर सिहोरा जिला आंदोलन के समर्थन में एकजुट नजर आया।


आंदोलनकारियों ने पूर्व में जारी राजपत्र और पूर्व में भाजपा नेताओं द्वारा सिहोरा को जिला बनाने को लेकर की गई घोषणाओं को आधार बनाकर सरकार से सीधा दावा किया। जनता का कहना है कि जब सब कुछ दस्तावेज़ों और बयानों में दर्ज है, तो फिर फैसले में देरी क्यों?


सरकार को सीधी चुनौती


आंदोलन के मंच से सरकार को खुली चुनौती देते हुए कहा गया—

“अगर जिला की घोषणा कभी हुई ही नहीं और हम सिहोरा वासी गलत बोल रहे हैं, तो हमारे सत्याग्रह को ठुकरा दो और सिहोरा को ग्राम पंचायत ही बना दो।”

इस बयान ने जनता के आक्रोश को और तीखा कर दिया।


शाम को निकली विशाल वाहन रैली


शाम के समय सिहोरा–खितौला क्षेत्र में विशाल वाहन रैली निकाली गई, जिसमें युवा, महिलाएं, बुजुर्ग और व्यापारी बड़ी संख्या में शामिल हुए। रैली के दौरान हर तरफ ‘सिहोरा जिला बनाओ’ के नारे गूंजते रहे।


व्यापारियों का निर्णायक ऐलान


व्यापारी संगठनों ने स्पष्ट कहा कि सिहोरा जिला बनने तक बंद जारी रहेगा। उनका कहना है कि यह अब आर्थिक नुकसान का नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के भविष्य और सम्मान का सवाल है।


आज सिहोरा की सड़कों से सरकार तक एक ही संदेश गया है—

अब आंदोलन रुकेगा नहीं।

यह लड़ाई अब मांग की नहीं, अधिकार और आत्मसम्मान की लड़ाई बन चुकी है।

प्रशांत बाजपेई
प्रशांत बाजपेई

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