बिलासपुर. छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में बर्ड फ्लू का बड़ा खतरा मंडरा रहा है। शहर के कोनी इलाके में बने सरकारी कुक्कुट पालन केंद्र (पोल्ट्री फार्म) में पिछले 6 दिनों के अंदर 5000 से ज्यादा मुर्गियों की संदिग्ध मौत हो गई है। एक साथ इतनी मुर्गियों के तड़प-तड़प कर मरने से प्रशासन और पशु चिकित्सा विभाग में हड़कंप मच गया है। शुरुआती लक्षणों को देखकर इसे बर्ड फ्लू माना जा रहा है। एहतियात के तौर पर फार्म को फिलहाल पूरी तरह सील कर दिया गया है।
इस मामले में पोल्ट्री फार्म के मैनेजर डॉ. संजय राज की गंभीर लापरवाही सामने आई है। शेड में मुर्गियों के मरने का सिलसिला 18 मार्च से ही शुरू हो गया था। फार्म में रोज मुर्गियां मर रही थीं, लेकिन मैनेजर ने उच्च अधिकारियों को इसकी कोई जानकारी नहीं दी। जब रविवार को मौत का आंकड़ा 5000 के पार पहुंच गया, तब डर के मारे उन्होंने अपने सीनियर्स को इसकी जानकारी दी। अधिकारियों का साफ कहना है कि अगर पहले ही बीमारी की पहचान कर ली जाती, तो संक्रमण को रोका जा सकता था। अब इस पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट कलेक्टर को सौंप दी गई है।
मुर्गियों की मौत का असली कारण क्या है, इसकी जांच के लिए मरे हुए पक्षियों के सैंपल भोपाल स्थित हाई-सिक्योरिटी लैब में भेजे गए हैं। वहां से रिपोर्ट आने के बाद ही बर्ड फ्लू की आधिकारिक पुष्टि होगी। मामले की गंभीरता को देखते हुए मंगलवार को रायपुर से आईएएस चंद्रकांत वर्मा और स्टेट लैब के डॉक्टरों की एक विशेष टीम बिलासपुर पहुंच रही है। यह टीम पोल्ट्री फार्म का मुआयना करेगी और जिम्मेदार लोगों के बयान दर्ज करेगी।
क्यों होती है मुर्गियों की सामूहिक मौत?
पोल्ट्री साइंस के जानकारों के मुताबिक, एक साथ इतनी बड़ी संख्या में पक्षियों का मरना किसी गंभीर वायरल संक्रमण का ही संकेत है।
वायरस का अटैक: आमतौर पर ऐसा रानीखेत या बर्ड फ्लू (एवियन इन्फ्लूएंजा - जैसे H5N1 स्ट्रेन) के कारण होता है। बर्ड फ्लू का वायरस पक्षियों के रेस्पिरेटरी (सांस) और नर्वस सिस्टम पर सीधा और बहुत तेज हमला करता है।
फैलने का तरीका: यह वायरस संक्रमित पक्षी की बीट, लार और छींक से निकलता है। शेड के अंदर यह हवा और पानी के जरिए बाकी पक्षियों में आग की तरह फैलता है।
मौत का कारण: फार्म के बंद शेड में एक साथ कई मुर्गियां होती हैं, जिससे वहां 'वायरल लोड' अचानक बढ़ जाता है। वायरस के असर से मुर्गियों के फेफड़े काम करना बंद कर देते हैं, जिससे कुछ ही घंटों में मास मॉर्टेलिटी (सामूहिक मौत) हो जाती है।
5 किलोमीटर का इलाका अलर्ट पर
बर्ड फ्लू की आशंका के चलते फार्म के आसपास के 5 किलोमीटर के दायरे को अति संवेदनशील (सेंसिटिव जोन) घोषित कर अलर्ट पर रखा गया है। यह सरकारी फार्म मुख्य रूप से किसानों को पालने के लिए चूजे (Chicks) बांटने के लिए बनाया गया है। यहां 6000 से ज्यादा पक्षी थे। अगर भोपाल लैब से बर्ड फ्लू की पुष्टि होती है, तो सरकारी प्रोटोकॉल के तहत बचे हुए सभी पक्षियों को मारा जाएगा (कलिंग) और सुरक्षित तरीके से दफनाया जाएगा। फिलहाल आसपास के इलाके में मुर्गियों की बिक्री पर भी रोक लगाने की तैयारी है।