WORLD NEWS: वॉशिंगटन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बड़े फैसले ने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। ईरान के साथ बढ़ते तनाव और हालिया हमले के बाद होर्मुज स्ट्रेट में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा के लिए शुरू किए गए अमेरिकी सैन्य मिशन “Project Freedom” को फिलहाल रोक दिया गया है।
ट्रंप ने मंगलवार शाम घोषणा करते हुए कहा कि यह फैसला आपसी सहमति और ईरान के साथ समझौते की दिशा में हो रही “महत्वपूर्ण प्रगति” को देखते हुए लिया गया है। हालांकि ईरानी सरकारी मीडिया ने इसे अपनी कूटनीतिक और सैन्य जीत करार देते हुए दावा किया कि अमेरिका वैश्विक जलमार्ग को सुरक्षित बनाने में नाकाम रहने के बाद पीछे हटने को मजबूर हुआ है।
इस फैसले की टाइमिंग पर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि एक दिन पहले ही अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और ज्वाइंट चीफ्स चेयरमैन जनरल डैन केन लगातार दावा कर रहे थे कि अब होर्मुज स्ट्रेट से जहाज पूरी तरह सुरक्षित निकल सकेंगे। लेकिन अगले ही दिन ट्रंप प्रशासन ने मिशन रोकने का ऐलान कर सबको चौंका दिया। ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि यह फैसला पाकिस्तान के अनुरोध पर लिया गया, जिसने अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाई है। हालांकि उन्होंने साफ किया कि ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकाबंदी जारी रहेगी।
दरअसल “Project Freedom” एक सीमित लेकिन बड़े पैमाने का रक्षात्मक सैन्य अभियान था, जिसका मकसद होर्मुज स्ट्रेट में फंसे व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित रास्ता देना था। अमेरिका ने इस मिशन के लिए 15 हजार से ज्यादा सैनिक, गाइडेड मिसाइल डेस्ट्रॉयर, हेलीकॉप्टर और 100 से अधिक विमान तैनात किए थे।
अमेरिकी सेना ने स्ट्रेट के दक्षिणी हिस्से में विशेष सुरक्षा क्षेत्र भी बनाया था, ताकि किसी भी खतरे को तुरंत रोका जा सके। अमेरिका के मुताबिक दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल की सप्लाई इसी समुद्री रास्ते से गुजरती है, इसलिए इसकी सुरक्षा वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम है। लेकिन अब अचानक मिशन रोकने के फैसले ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या ईरान के दबाव और हमले के बाद ट्रंप प्रशासन को रणनीति बदलने पर मजबूर होना पड़ा है।
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