बिलासपुर। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली ख़ामेनेई के निधन की खबर के बाद पूरी दुनिया के साथ-साथ अब छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर में भी शोक की लहर दौड़ गई है। शहर के सरकंडा थाना अंतर्गत चांटीडीह क्षेत्र में शिया और सुन्नी समुदाय के लोगों ने आपसी एकजुटता की मिसाल पेश करते हुए एक विशाल कैंडल मार्च और मातमी जुलूस निकाला।
जम्मू-कश्मीर, लखनऊ और कर्नाटक जैसे बड़े केंद्रों के बाद बिलासपुर में भी शिया समुदाय के लोगों ने अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं और इस दुख की घड़ी में ‘शिया सुन्नी भाई-भाई’ के नारे लगाकर सांप्रदायिक सौहार्द का संदेश दिया। चांटीडीह की गलियों में निकले इस जुलूस में भारी संख्या में लोग शामिल हुए, जिन्होंने हाथों में मोमबत्तियां और शोक के बैनर लेकर ख़ामेनेई को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान पूरे क्षेत्र में माहौल गमगीन बना रहा और समुदाय के बुजुर्गों व युवाओं ने मिलकर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी भावनाओं को प्रकट किया। बिलासपुर के मुस्लिम समाज का यह कैंडल मार्च न केवल एक वैश्विक नेता के प्रति सम्मान था, बल्कि शहर की गंगा-जमुनी तहजीब का एक जीवंत उदाहरण भी बना।

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