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Mardani 3 Review: हाई-प्रोफाइल किडनैपिंग या देश का सबसे बड़ा नेटवर्क? ‘मर्दानी 3’ का सस्पेंस चौंकाता है—यहाँ देखिए पूरा रिव्यू

30 Jan 2026 | WEENEWS DESK | 99 views
Mardani 3 Review: हाई-प्रोफाइल किडनैपिंग या देश का सबसे बड़ा नेटवर्क? ‘मर्दानी 3’ का सस्पेंस चौंकाता है—यहाँ देखिए पूरा रिव्यू

Mardani 3 Review: रानी मुखर्जी की सबसे भरोसेमंद और लोकप्रिय फ्रैंचाइजी ‘मर्दानी’ एक बार फिर बड़े पर्दे पर लौटी है। ‘मर्दानी 3’ सिर्फ एक क्राइम फिल्म नहीं बल्कि एक सामाजिक चेतावनी है, जो छोटी बच्चियों पर हो रहे अपराध, मानव तस्करी और सिस्टम की जटिलताओं को सामने लाती है।

पहले दो हिस्सों की तरह इस बार भी फिल्म का स्वर गंभीर, यथार्थवादी और भावनात्मक है। निर्देशक अभिराज मीनावाला ने कहानी को बिना अनावश्यक ग्लैमर या मसाले के पेश किया है, जिससे फिल्म शुरू से ही एक भारी माहौल बनाती है और दर्शक को कहानी से बांधे रखती है।

कहानी

फिल्म में ACP शिवानी रॉय (रानी मुखर्जी) अब NIA के साथ काम कर रही हैं। कहानी की शुरुआत एक हाई-प्रोफाइल किडनैपिंग केस से होती है, जहां एक बड़े अधिकारी की बेटी और उसी घर में काम करने वाली नौकरानी की बेटी अचानक लापता हो जाती हैं। यह मामला देखते ही देखते प्रशासन और पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है। इसी बीच देश के अलग-अलग राज्यों से 8 से 12 साल की कुल 93 बच्चियों के गायब होने की रिपोर्ट सामने आती है।

शुरुआत में ये सभी मामले अलग-अलग प्रतीत होते हैं, लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ती है, शिवानी को एक बड़े और खतरनाक नेटवर्क का आभास होता है। जल्द ही खुलासा होता है कि इसके पीछे एक संगठित मानव तस्करी गिरोह है, जिसकी मुखिया एक रहस्यमयी और बेहद चालाक बुजुर्ग महिला ‘अम्मा’ है। यह गिरोह बच्चियों को अगवा कर उन्हें गैरकानूनी गतिविधियों में धकेलता है।

जांच के दौरान यह भी सामने आता है कि इस पूरे नेटवर्क का संबंध एक भिखारी गैंग से है, जो मजबूरी और दया का दिखावा करके मेडिकल फील्ड में अवैध कारोबार चलाता है। शिवानी अपनी टीम के साथ लगातार दबाव, राजनीतिक हस्तक्षेप और खतरों के बीच सबूत जुटाती हैं, नेटवर्क की परतें खोलती हैं और बच्चियों को बचाने के लिए एक के बाद एक जोखिम भरे ऑपरेशन को अंजाम देती हैं। फिल्म कई जगह दिल को झकझोरने वाले दृश्य दिखाती है, जो दर्शकों को सोचने पर मजबूर करते हैं।

अभिनय

ACP शिवानी रॉय के रूप में रानी मुखर्जी एक बार फिर फिल्म की सबसे बड़ी ताकत साबित होती हैं। उनका अभिनय बेहद सधा हुआ और प्रभावशाली है। जांच का दबाव, गुस्सा, दर्द और जिम्मेदारी—हर भाव को उन्होंने बिना ओवरएक्टिंग के गहराई से निभाया है। यह साफ महसूस होता है कि यह किरदार रानी के करियर के सबसे मजबूत किरदारों में से एक है।

विलेन ‘अम्मा’ के रूप में मल्लिका प्रसाद फिल्म की जान हैं। उनका शांत, ठंडा लेकिन खतरनाक अंदाज दर्शकों के मन में डर पैदा करता है। रानी और मल्लिका के आमने-सामने के दृश्य फिल्म को और ऊंचाई देते हैं। जानकी बोड़ीवाला शिवानी की टीम में एक अहम रोल निभाती हैं और अपने सीमित स्क्रीन टाइम में भी प्रभाव छोड़ती हैं। उनके किरदार में एक हल्की जटिलता है, जो कहानी को और दिलचस्प बनाती है। प्रजेश कश्यप रामानुजन के किरदार में ठोस नजर आते हैं, वहीं बाकी कलाकार भी अपनी भूमिकाओं के साथ न्याय करते हैं।

निर्देशन और तकनीकी पक्ष

निर्देशक अभिराज मीनावाला का काम सराहनीय है। उन्होंने कहानी की गंभीरता को बनाए रखा है और फिल्म की रफ्तार को संतुलित रखा है। बैकग्राउंड स्कोर कहानी की टेंशन को बढ़ाता है, कैमरा वर्क यथार्थ के करीब है और एडिटिंग फिल्म को कहीं भी खिंचने नहीं देती। एक्शन सीमित है लेकिन प्रभावी है और दिखावटी नहीं लगता।

कमियां

फिल्म की सबसे बड़ी कमी यह है कि इसकी कहानी का ढांचा पहले की ‘मर्दानी’ फिल्मों से काफी मिलता-जुलता है। कुछ मोड़ पहले से अनुमानित हो जाते हैं और इंटरवल से पहले का हिस्सा थोड़ा प्रेडिक्टेबल लगता है। कुछ इमोशनल सीन जल्दबाजी में खत्म होते हैं, जहां थोड़ी और गहराई लाई जा सकती थी। सस्पेंस के कुछ हिस्से उम्मीद के मुताबिक चौंकाते नहीं हैं।

देखें या न देखें?

अगर आप रानी मुखर्जी का दमदार और गंभीर अभिनय देखना चाहते हैं, सामाजिक मुद्दों पर आधारित क्राइम थ्रिलर पसंद करते हैं और ऐसी फिल्में देखते हैं जो सिर्फ मनोरंजन नहीं बल्कि सवाल भी खड़े करें, तो ‘मर्दानी 3’ आपके लिए जरूर देखने लायक फिल्म है। यह फिल्म आपको झकझोरती है और सोचने पर मजबूर करती है—और यही इसकी सबसे बड़ी ताकत है।




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