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जर्जर सीपत-बलौदा मार्ग पर मरम्मत के नाम पर मजाक: गड्ढे पाटकर भूले जिम्मेदार, ओवरलोड वाहनों से राहगीर हलकान

30 Oct 2025 | JAY SHANKAR PANDEY | 281 views
जर्जर सीपत-बलौदा मार्ग पर मरम्मत के नाम पर मजाक: गड्ढे पाटकर भूले जिम्मेदार, ओवरलोड वाहनों से राहगीर हलकान

बिलासपुर। सीपत से बलौदा तक का मार्ग अब सिर्फ सड़क नहीं, बल्कि सड़क के नाम पर एक बड़ा संकट बन चुका है। मार्ग की बदहाली ऐसी है कि कुछ किलोमीटर का सफर भी किसी आफत से कम नहीं है । आलम यह है कि सड़क मरमत के नाम पर सिर्फ औपचारिकता निभाई गई है और बड़े-बड़े गड्ढों को मिट्टी और मुरुम से पाटकर जिम्मेदार अधिकारी भूल गए है। जिसके बाद ओवरलोड गाड़ियों की लगातार आवाजाही से स्थिति और भी बदतर हो गई है।



सिर्फ धूल और गड्ढे: सफर हुआ मुश्किल


बलौदा सीपत मार्ग एनटीपीसी सीपत और कोयला परिवहन का एक प्रमुख रूट है, जिस पर दिन-रात भारी-भरकम ट्रेलरों और हाइवा की आवाजाही रहती है। स्थानीय प्रशासन की लापरवाही का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जर्जर सड़क पर ओवरलोड वाहन बेरोकटोक अटखेलियां करते हैं, जिससे अक्सर दुर्घटना की स्थिति बनी रहती है।


सड़क पर जगह-जगह बने गहरे गड्ढों के कारण छोटे वाहन चालकों को मजबूरन गाड़ी धीमी गति से चलना पड़ता है, जिससे यातायात व्यवस्था चरमरा जाती है। वहीं, मिट्टी पाटकर की गई तात्कालिक मरम्मत अब सड़क पर सिर्फ सूखी धूल का गुबार बनकर रह गई है।


धूल फांककर जी रहे लोग सांस लेना भी दूभर


इस मार्ग से गुजरने वाले राहगीरों और आसपास के दुकानदारों का हाल सबसे बुरा है। उड़ती धूल के कारण सड़क किनारे बसे गांवों और बस्तियों के लोग सांस लेने की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं। दिन भर धूल के कण हवा में तैरते रहते हैं, जिससे फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।


धूल फांककर जी रहे लोग


5 किलोमीटर का सफर 40 मिनट में पूरा होता है और शरीर का हर अंग दर्द करने लगता है। बच्चों को स्कूल भेजना भी अब खतरे से खाली नहीं लगता। सुधार के नाम पर मिट्टी डाल दी गई, जो अब उड़कर हमारे घरों में भर रही है। क्या आला अधिकारियों को सिर्फ शहर की सड़कें ही दिखती हैं? ग्रामीण मार्ग उनके लिए मायने नहीं रखते?"

रमेश साहू, स्थानीय निवासी ग्राम खांडा


शहरों तक सीमित स्वत: संज्ञान लेने वाले अधिकारी


स्थानीय निवासियों का कहना है कि सड़क की दयनीय हालत पर जिले के आला अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं। सड़कों पर मनमानी करते ओवरलोड वाहन, जाम की समस्या और जानलेवा गड्ढों की शिकायत के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है। ऐसा लगता है कि स्वत: संज्ञान लेने वाले अधिकारी सिर्फ शहरों तक ही सीमित हैं। ग्रामीण अंचल की जनता, जो इस मार्ग पर सफर करने को मजबूर है, उनकी परेशानी सुनने वाला कोई नहीं है।

JAY SHANKAR PANDEY
JAY SHANKAR PANDEY

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