जांजगीर–चांपा। CG NEWS : जहां आज के दौर में लोग अपनों से दूरी बना रहे हैं, वहीं जिले का ग्राम कुटरा आज भी आपसी भरोसे, संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी की परम्परा को निभा रहे है। यह गांव अब “इंसानियत के गांव” के रूप में पहचाना जाने लगा है। हाल ही में कुटरा मालगुजार परिवार से जुड़े जांजगीर निवासी राघवेन्द्र पाण्डेय के पास एक नौजवान सहायता की उम्मीद लेकर पहुंचा। पिता के निधन के बाद उसका परिवार संकट से जूझ रहा है। वृद्ध मां और बहन के साथ रहने के लिए पक्का मकान नहीं है। आवास योजना में आवेदन स्वीकृत होने की प्रतीक्षा है, लेकिन जमीन के अभाव में निर्माण अटका हुआ है। स्थिति सुनते ही राघवेन्द्र पाण्डेय ने उसे भरोसा दिलाया कि जैसे ही आवास स्वीकृत होगा भूमिपूजन कर उनका घर बनवाया जाएगा। यह आश्वासन उस परिवार के लिए नई उम्मीद बन गया।
बताते चलें कि है इससे पहले भी सड़क निर्माण के दौरान बेघर हुई एक महिला के मकान बनवाने में भी उन्होंने सहयोग था। गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि अकाल के कठिन दौर में भी यहां कोई भूखा नहीं सोया, क्योंकि कुटरा केवल गांव नहीं, बल्कि एक परिवार है। आज भी यहां घर ईंट–पत्थर से नहीं, बल्कि इंसानियत, भरोसे और अपनत्व से बनते हैं। यहां सामाजिक रिश्तों का जीवंत परिवार बसता है।
CG Video : फेयरवेल की मौज या मौत को दावत? स्कूल के बाहर चलती कारों की छत पर स्टंट, पुलिस ने सिखाया कानून का पाठ
सामाजिक समरसता की परम्परा, 350 साल पुरानी समरसता की परंपरा
स्व. अजीतराम पाण्डेय ने विभिन्न समाजों को साथ लेकर गांव बसाया तथा 18 एकड़ निजी भूमि पर विशाल तालाब का निर्माण जल संरक्षण को बढ़ावा दिया जो आज भी अधिकांश ग्रामीणों का मुख्य जलस्रोत है, स्व. मलिकराम पाण्डेय ने वर्ष 1954 में जनसहयोग से विद्यालय निर्माण कराया, वहीं स्व. रामसरकार पांडे ने कृषि एवं सामाजिक उत्थान में उल्लेखनीय योगदान दिया।
भरोसा है कि कुटरा सरकार बेघर नहीं करेंगे
गांव प्रवास के दौरान एक कारपेंटर ने बताया कि उसने पाण्डेय परिवार की जमीन पर ही अपना घर बना लिया है। जब राघवेन्द्र पाण्डेय ने उनसे पूछा किस हक से तो उसने सहजता से कहाकि हक तो नही है, पर भरोसा है कुटरा के सरकार उन्हें बेघर नहीं करेंगे, यही विश्वास कुटरा की असली ताकत है।