कोलकाता। Bengal Politics: कोलकाता में विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद भी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस्तीफा देने से इनकार कर राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। ममता बनर्जी ने चुनाव परिणामों पर सवाल उठाते हुए ‘वोट चोरी’ और गड़बड़ी के आरोप लगाए और कहा कि असली जनादेश सामने नहीं आया है, इसलिए वह अभी राजभवन जाकर इस्तीफा नहीं देंगी। उनके इस बयान के तुरंत बाद चुनाव आयोग भी सक्रिय हो गया और पश्चिम बंगाल में नई विधानसभा के गठन के लिए अधिसूचना जारी कर दी।
आयोग ने यह अधिसूचना राज्यपाल को भेजते हुए साफ संकेत दिया कि चुनावी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अब नई सरकार के गठन की संवैधानिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। निर्वाचन आयोग के अधिकारियों ने कहा कि मतदान से लेकर मतगणना तक पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न हुई है तथा अब निर्वाचित प्रतिनिधियों के शपथ ग्रहण और नई सरकार के गठन का रास्ता साफ हो गया है।
ममता बनर्जी के “मैं इस्तीफा क्यों दूं?” वाले बयान के बाद भाजपा ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता उज्जवल निकम ने इसे लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ बताते हुए कहा कि देश में पहली बार कोई मुख्यमंत्री चुनाव हारने के बाद पद छोड़ने से इनकार कर रहा है। वहीं संवैधानिक विशेषज्ञों का कहना है कि ममता बनर्जी के पास आखिरकार पद छोड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा।
लोकसभा के पूर्व महासचिव पी डी टी आचारी ने कहा कि नए मुख्यमंत्री के शपथ लेते ही मौजूदा मुख्यमंत्री का कार्यकाल स्वतः समाप्त हो जाएगा, क्योंकि एक राज्य में दो मुख्यमंत्री नहीं हो सकते। वरिष्ठ अधिवक्ता अजीत सिन्हा ने भी कहा कि यदि नई सरकार बन जाती है तो ममता बनर्जी स्वतः पद से हट चुकी मानी जाएंगी। विशेषज्ञों ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर संवैधानिक संकट की स्थिति बनती है तो राज्यपाल हस्तक्षेप करते हुए मुख्यमंत्री को बर्खास्त भी कर सकते हैं। बंगाल की राजनीति में ममता बनर्जी के इस रुख ने अब बड़ा संवैधानिक और राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है।