Disadvantages of drinking milk: उम्र बढ़ने के साथ शरीर में कई बदलाव आते हैं, और इन्हीं में एक है दूध पचाने की क्षमता का कम होना। हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि जैसे-जैसे भारतीयों की उम्र बढ़ती है, शरीर लैक्टोज को टोलरेट नहीं कर पाता। इससे पेट में भारीपन, गैस और ब्लोटिंग की समस्या होने लगती है।
FMRI गुरुग्राम की क्लिनिकल न्यूट्रिशनिस्ट डॉ. दीप्ति खटूजा के अनुसार—
बढ़ती उम्र के साथ लैक्टोज पचाने वाले एन्जाइम की मात्रा कम हो जाती है।
इसके कारण बुज़ुर्गों को दूध पीने के बाद पेट खराब, ब्लोटिंग, गैस और भारीपन हो सकता है।
ऐसे में दूध की जगह दही का सेवन ज्यादा फायदेमंद माना जाता है क्योंकि दही आसानी से पच जाता है और इसमें कैल्शियम व प्रोटीन भी अच्छी मात्रा में होता है।
डॉ. खटूजा के अनुसार—
आजकल कई लोग दूध की शुद्धता पर संदेह होने के कारण आलमंड और सोया मिल्क की तरफ शिफ्ट हो रहे हैं।
यदि किसी को दूध पचाने में परेशानी नहीं है, तो दूध छोड़ने की कोई जरूरत नहीं है।
लेकिन जिन्हें लैक्टोज इंटॉलरेंस या ब्लोटिंग जैसी समस्या रहती है, उनके लिए आलमंड या सोया मिल्क बेहतर विकल्प हो सकता है।
अगर दूध पीने से ब्लोटिंग और पेट भारी लगने लगे, तो
पूरा लैक्टोज-फ्री मिल्क लेने के बजाय दही खाना ज्यादा लाभकारी है।
दही में प्रोबायोटिक्स होते हैं, जो पाचन शक्ति बढ़ाते हैं।
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