बिलासपुर। CG NEWS : शहर के दिल में बन रहा शिवघाट और पश्चिमी घाट बैराज… करोड़ों की लागत वाली ये परियोजना शहर के विकास का सपना थी, लेकिन अब यही सपना भ्रष्टाचार, लापरवाही और खराब गुणवत्ता के अंधेरे में डूबता दिख रहा है। ग्रैंड न्यूज़ की टीम ने जब मौके पर जाकर सच्चाई देखी, तो मामला उम्मीद से कहीं ज्यादा गंभीर निकला।
कांग्रेस शासनकाल में शुरू हुई शिवघाट बैराज परियोजना का काम पिछले दो साल से लगातार अटका पड़ा है। 63 करोड़ की विशाल लागत वाली ये परियोजना कब पूरी होगी… कोई नहीं जानता। लेकिन इतना जरूर पता चला कि यहां काम की गति से ज्यादा घोटाले और लापरवाही तेज़ी से बढ़ रहे हैं।ग्रैंड न्यूज़ की टीम ने आज शिवघाट बैराज स्थल पर ग्राउंड रिपोर्टिंग के लिए पहुंचकर निरीक्षण किया। और जो देखा… वो चौंकाने वाला था। ठेकेदार के कर्मचारी बिना किसी विभागीय अधिकारी की मौजूदगी में मनमाने तरीके से काम कर रहे थे।सबसे बड़ा खुलासा प्री-कास्ट का काम बिना छड़ डाले किया जा रहा था जी हां…करोड़ों के बैराज में बिना सरिए के निर्माण कार्य ये मज़ाक है, लापरवाही है या सीधा-सीधा भ्रष्टाचार,ये लोग समझ ही नहीं पा रहे हैं।जब हमारी टीम ने वहां खड़े कर्मचारियों से पूछा सरकारी इंजीनियर या अधिकारी कहां हैं?तो जवाब मिला कोई अधिकारी यहां नहीं आता।ये सुनकर साफ हो गया कि जल संसाधन विभाग के अधिकारी किस हद तक गैरजिम्मेदार बने हुए हैं। उनके गैरहाजिर रहने का फायदा उठाकर ठेकेदार के कर्मचारी गुणवत्ता को ताक पर रखकर जैसा मन चाहे वैसा काम कर रहे हैं।
जांच के दौरान एक और बड़ा खुलासा हुआ। प्री-कास्ट में जो मसाला इस्तेमाल किया जा रहा था, उसमें सीमेंट की मात्रा बेहद कम थी। मसाले में पत्थर और गिट्टी की जगह रेत से निकले बड़े-बड़े टुकड़े मिले। यानी निर्माण की गुणवत्ता इतनी खराब कि थोड़ी बारिश या पानी का बहाव भी इसे नष्ट कर सकता है।सोचने वाली बात यह है कि जब शहर के बीचों-बीच, अधिकारियों की नाक के नीचे यह खुली मनमानी और घटिया काम किया जा रहा है… तो दूर-दराज गांवों में क्या हाल होता होगा? यह सवाल शहरवासियों के गले में फंसी टीस बन चुका है।
विभाग की कुंभकरनी नींद का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि कार्य 2023 में पूरा होना चाहिए था… लेकिन 2025 आ गया, बैराज अभी भी अधूरा और भ्रष्टाचार पूरा 63 करोड़ का काम भ्रष्टाचार की बलि चढ़ता दिख रहा है। विभागीय अधिकारी चुप, शासन मौन, और ठेकेदार मनमानी पर उतारू ये स्थिति शहर के लिए खतरनाक है।अब बड़ा सवाल यही है।क्या इस खबर के बाद जल संसाधन विभाग जागेगा? क्या भ्रष्ट ठेकेदार पर कार्रवाई होगी? क्या 63 करोड़ का ये बैराज सही गुणवत्ता से बनेगा… या फिर खामोशी और भ्रष्टाचार की मिलीजुली चाल का शिकार होकर सालों तक अधूरा पड़ा रहेगा?सवाल जनता का हैं…जवाब अधिकारियों को अब देना ही होगा…