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प्रकृति, रोमांच और आस्था का संगम बन रहा धमतरी, पर्यटन को मिल रही नई पहचान

27 Oct 2026 | WEENEWS DESK | 729 views
प्रकृति, रोमांच और आस्था का संगम बन रहा धमतरी, पर्यटन को मिल रही नई पहचान

रायपुर : पर्यटन के नए क्षितिज पर धमतरी, जबर्रा में साहसिक गतिविधियों से बढ़ा आकर्षण प्राकृतिक सौंदर्य, विशाल जलाशयों, समृद्ध वनांचल और ऐतिहासिक-सांस्कृतिक विरासत से परिपूर्ण धमतरी जिला पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान बना रहा है। इसी कड़ी में वनग्राम जबर्रा में आयोजित दो दिवसीय ‘नाइट ट्रेकिंग एवं कैंपिंग’ कार्यक्रम ने इको-टूरिज्म और साहसिक पर्यटन की संभावनाओं को नई दिशा दी है। यूथ हॉस्टल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (YHAI) की धमतरी इकाई द्वारा आयोजित अभियान को विधायक ओंकार साहू ने सिहावा चौक से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इसमें छत्तीसगढ़ सहित इस एडवेंचर कैंप में तीन राज्यों (छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र) के 11 अलग-अलग शहरों से आए 46 प्रकृति प्रेमियों, प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया।

दो दिवसीय आयोजन में प्रतिभागियों ने डोंगरी ट्रेकिंग, कैंपफायर और घने जंगलों के बीच नदी किनारे रात्रिकालीन ट्रेकिंग का रोमांच अनुभव किया। शरद पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में नाइट ट्रेकिंग, कैंपिंग, बर्ड वाचिंग और स्टार गेजिंग (तारे देखना) जैसी साहसिक गतिविधियां शामिल थीं । प्रतिभागियों ने स्वयं नाश्ता तैयार कर सामूहिक सहभागिता का परिचय दिया, वहीं दूसरे दिन 15 किलोमीटर लंबे ‘ट्रैक्टर ट्रेल’ ने रोमांच बढ़ाया। इस दौरान सुरक्षित भव फाउंडेशन के डॉ. संदीप धूपड़ ने सड़क सुरक्षा एवं यातायात नियमों की जानकारी दी।
धमतरी कलेक्टर ने जिले की पर्यटन संभावनाओं को रेखांकित करते हुए बताया कि गंगरेल जलाशय में वॉटर स्पोर्ट्स और कयाकिंग जैसी गतिविधियां पर्यटकों को आकर्षित कर रही हैं, जबकि जबर्रा का प्राकृतिक वातावरण कैंपिंग, ट्रेकिंग और नेचर ट्रेल के लिए अनुकूल है। वहीं सिहावा में महानदी का उद्गम स्थल, श्रृंगी ऋषि आश्रम, कर्णेश्वर महादेव मंदिर, रुद्रेश्वर मंदिर और मां अंगारमोती मंदिर धार्मिक पर्यटन को विशिष्ट पहचान देते हैं। इन स्थलों का समन्वित विकास धमतरी को प्रमुख पर्यटन गंतव्य बनाने में सहायक होगा।

प्रकृति आधारित पर्यटन के विस्तार से स्थानीय युवाओं को गाइड, होम-स्टे, परिवहन, पारंपरिक खानपान, कैंपिंग और हस्तशिल्प के क्षेत्र में रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर मिलेंगे। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ स्थानीय संस्कृति को भी प्रोत्साहन मिलेगा। पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और स्थानीय समुदाय की भागीदारी को प्राथमिकता देते हुए किए जा रहे प्रयास धमतरी को मध्य भारत के पर्यटन मानचित्र पर प्रकृति, रोमांच और आस्था के आकर्षक केंद्र के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। प्रतिभागियों को जबर्रा की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, लोक कलाओं और सघन वन क्षेत्र से रूबरू कराया गया। शहरी पर्यटकों को पारंपरिक छत्तीसगढ़ी भोजन (जैसे चीला, फरा, मुठिया) बेहद पसंद आता है। युवा इसके जरिए कैटरिंग और फूड स्टॉल का व्यवसाय शुरू कर रहे हैं। जबर्रा और आसपास के वन क्षेत्रों के महुआ, शहद, हर्बल उत्पाद और पारंपरिक हस्तशिल्प की बिक्री से महिलाओं और कारीगरों को सीधा आर्थिक लाभ मिल रहा है।

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