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CG NEWS : बस्तर दशहरा खत्म होते ही कुमार जयदेव ने निभाया वादा, रथ निर्माण कारीगरों को भेंट किए 50 हजार रुपये और बकरा

27 Oct 2026 | WEENEWS DESK | 725 views
CG NEWS : बस्तर दशहरा खत्म होते ही कुमार जयदेव ने निभाया वादा, रथ निर्माण कारीगरों को भेंट किए 50 हजार रुपये और बकरा

जगदलपुर। CG NEWS : बस्तर संभाग मुख्यालय जगदलपुर में बस्तर दशहरा की ऐतिहासिक परंपराओं को निभाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले रथ निर्माण कारीगरों, पुजारियों, मांझी-चालकियों और दशहरा की व्यवस्थाओं से जुड़े लोगों के सम्मान में बस्तर धाकड़ क्षत्रिय राजपूत समाज के संरक्षक एवं सुकमा जमींदार परिवार के कुमार जयदेव के वृंदावन कॉलोनी स्थित निवास पर आत्मीय सम्मान समारोह जुहारानी भेंट कार्यक्रम आयोजित किया गया। दशहरा पर्व के सफल समापन के बाद आयोजित इस कार्यक्रम में कुमार जयदेव ने रथ निर्माण में जुटे पारंपरिक कारीगरों से किया अपना वादा पूरा करते हुए उन्हें 50 हजार रुपये की सम्मान राशि और एक बकरा भेंट किया।

इसी दौरान, कार्यक्रम में दंतेश्वरी मंदिर के प्रधान पुजारी कृष्ण कुमार पाढ़ी ने पुजारी वर्ग के उपेक्षा किए जाने एवं मानदेय में वृद्धि नहीं होने पर शासन-प्रशासन के प्रति नाराजगी व्यक्त करते हुए उनके आर्थिक हितों पर भी ध्यान देने की मांग उठाई।

बस्तर दशहरा की परंपरा में रथ निर्माण करने वाले कारीगरों का विशेष महत्व है। परंपरागत रूप से चारूमार्गांव और बेड़ा उमरगांव के ग्रामीण पीढ़ियों से इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी का निर्वहन करते आ रहे हैं। दशहरा के दौरान रथ निर्माण और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं में इन कारीगरों की मेहनत और समर्पण का अहम योगदान रहता है।

दशहरा पर्व के दौरान रथ निर्माण स्थल सिरहासार चौक पर कारीगरों से मुलाकात के समय कुमार जयदेव को पता चला कि शासन की ओर से भोजन-नाश्ते की व्यवस्था होने के बावजूद वह कारीगरों की आवश्यकताओं के अनुरूप पर्याप्त नहीं है। इस पर उन्होंने तत्काल अपनी ओर से मावली मंदिर में कारीगरों के लिए प्रतिदिन भोजन और नाश्ते की व्यवस्था करने का आश्वासन दिया था।

कुमार जयदेव ने अपने इस वचन को निभाते हुए दशहरा प्रारंभ होने से लेकर पर्व की समाप्ति तक लगातार कारीगरों के लिए भोजन और नाश्ते की व्यवस्था कराई। इसी दौरान उन्होंने कारीगरों को 50 हजार रुपये और एक बकरा देने की घोषणा भी की थी। दशहरा संपन्न होने के बाद आयोजित सम्मान समारोह में उन्होंने यह वादा पूरा कर अपनी प्रतिबद्धता का परिचय दिया।

कार्यक्रम के दौरान दंतेश्वरी मंदिर के प्रधान पुजारी कृष्ण कुमार पाढ़ी ने मांझी-चालकियों के वेतनमान में वृद्धि के निर्णय का स्वागत किया, लेकिन पुजारी वर्ग के मानदेय में बढ़ोतरी नहीं होने पर नाराजगी भी जताई। उन्होंने कहा कि मांझी-चालकियों का वेतन बढ़ाना अच्छी बात है और इसका स्वागत किया जाना चाहिए, लेकिन शासन-प्रशासन को पुजारियों की आर्थिक स्थिति और उनकी आवश्यकताओं पर भी ध्यान देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि पुजारी वर्ग दिनभर भगवान की सेवा और दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की धार्मिक आवश्यकताओं के निर्वहन में लगा रहता है। इसके बावजूद पुजारियों को मात्र 3,200 रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलता है, जो वर्तमान महंगाई के दौर में बेहद कम है। इतनी कम राशि में परिवार का भरण-पोषण करना आसान नहीं है।

प्रधान पुजारी ने कहा कि जब शासन-प्रशासन मांझी-चालकियों के वेतनमान में वृद्धि की दिशा में कदम उठा रहा है, तो पुजारियों के मानदेय में भी बढ़ोतरी पर विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने इस बात पर असंतोष जताया कि पुजारी वर्ग की समस्याओं और आर्थिक जरूरतों पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उनके अनुसार, धार्मिक परंपराओं के निर्वहन में पुजारियों की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसलिए उनके सम्मान और आर्थिक सुरक्षा को भी प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

समारोह में जगदलपुर और दंतेवाड़ा सहित विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे पुजारी, मांझी-चालकी, दशहरा की धार्मिक एवं पारंपरिक व्यवस्थाओं से जुड़े प्रतिनिधि तथा बस्तर धाकड़ क्षत्रिय राजपूत समाज के सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

बस्तर दशहरा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि यहां की विशिष्ट आदिवासी संस्कृति, आस्था और सदियों पुरानी परंपराओं का प्रतीक है। इसके आयोजन में रथ निर्माण कारीगरों से लेकर पुजारियों, मांझी-चालकियों और विभिन्न पारंपरिक भूमिकाओं का निर्वहन करने वाले लोगों तक, सभी का योगदान महत्वपूर्ण है।

कुमार जयदेव द्वारा दशहरा के दौरान भोजन-नाश्ते की व्यवस्था और पर्व के समापन पर कारीगरों को सम्मान राशि एवं बकरा भेंट करना जहां उनके वचन निभाने की पहल रही, वहीं प्रधान पुजारी कृष्ण कुमार पाढ़ी द्वारा मानदेय वृद्धि का मुद्दा उठाए जाने से दशहरा से जुड़े पारंपरिक सेवा वर्गों की आर्थिक स्थिति पर भी चर्चा केंद्रित हुई। कार्यक्रम ने एक ओर परंपरा के संवाहकों के सम्मान का संदेश दिया, तो दूसरी ओर पुजारी वर्ग के मानदेय में वृद्धि की आवश्यकता को भी सामने रखा।


WEENEWS DESK
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