CG | Sat, 07 November 2026

No Ad Available

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की ‘विष्णु की पाती’ पाकर लोक साहित्यकार डॉ. जयमती कश्यप ने जताया आभार

07 Nov 2026 | WEENEWS DESK | 853 views
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की ‘विष्णु की पाती’ पाकर लोक साहित्यकार डॉ. जयमती कश्यप ने जताया आभार

कोण्डागांव: छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा लोक साहित्यकार एवं समाजसेवी डॉ. जयमती कश्यप को प्रेषित आत्मीय पत्र ‘विष्णु की पाती’ ने उन्हें अभिभूत कर दिया। मुख्यमंत्री द्वारा उनके सामाजिक एवं रचनात्मक योगदान की सराहना किए जाने पर डॉ. जयमती कश्यप ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताया है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने पत्र में डॉ. कश्यप द्वारा बच्चों की शिक्षा, पोषण तथा गोंडी भाषा के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए किए जा रहे प्रयासों की विशेष रूप से सराहना की है। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में 12 वर्षों और पोषण के क्षेत्र में 5 वर्षों की उनकी सेवाओं को समाज के प्रति समर्पण का प्रतीक बताया। साथ ही बच्चों के उज्ज्वल भविष्य और महिलाओं के आत्मविश्वास को बढ़ाने की दिशा में उनके प्रयासों की प्रशंसा की।
मुख्यमंत्री ने पत्र में उल्लेख किया कि डॉ. कश्यप के साथ कार्य करने वाली महिलाएं अपने दायित्वों का कुशलतापूर्वक निर्वहन कर रही हैं और बच्चों को उच्च शिक्षा की ओर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं। ग्रामीण महिलाओं को स्वयं निर्णय लेने में सक्षम बनाने की उनकी पहल भी सराहनीय है।

इसके साथ ही गोंडी लोकगीतों के गायन और गोंडी साहित्य के माध्यम से स्थानीय भाषा एवं परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उनके प्रयासों की भी मुख्यमंत्री ने प्रशंसा की। उन्होंने डॉ. कश्यप को रानी दुर्गावती सम्मान एवं राष्ट्रीय देवी अहिल्या सम्मान सहित प्राप्त सम्मानों के लिए बधाई दी।
मुख्यमंत्री ने विकसित भारत 2047 के संकल्प के अनुरूप विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में बच्चों की शिक्षा और महिलाओं के आत्मविश्वास को महत्वपूर्ण बताते हुए डॉ. कश्यप के योगदान को सार्थक बताया।
डॉ. जयमती कश्यप ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा उनके कार्यों को पहचान एवं प्रोत्साहन दिए जाने पर आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह आत्मीय पत्र उनके लिए सम्मान के साथ-साथ समाजहित में निरंतर कार्य करते रहने की प्रेरणा है। उन्होंने शिक्षा, पोषण, महिला सशक्तिकरण और गोंडी भाषा-साहित्य के संरक्षण के क्षेत्र में अपने प्रयासों को आगे भी जारी रखने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

WEENEWS DESK
WEENEWS DESK

Join WhatsApp