रायपुर। सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत गरीब परिवारों को मिलने वाले सरकारी चावल की कालाबाजारी का बड़ा खेल एक बार फिर बेनकाब हुआ है। सिस्टम की आंखों में धूल झोंककर राशन दुकानों से हितग्राहियों को चावल देने के बजाय, इसे सीधे राइस मिलों में खपाया जा रहा है।
राजधानी रायपुर और आसपास के इलाकों में कई दुकानदार राशनकार्डधारियों को ‘चावल का स्टॉक नहीं है’ कहकर बैरंग लौटा रहे हैं। जो हितग्राही विरोध करते हैं, उन्हें राशन के बदले मामूली रकम देकर चलता किया जा रहा है। इसके बाद यही चावल गाड़ियों में भरकर रातों-रात मिलों के हवाले कर दिया जाता है। यह सीधे तौर पर हितग्राहियों के खाद्य सुरक्षा अधिकारों पर डकैती है।
हितग्राही परेशान, जानबूझकर कराते हैं इंतजार
दुकानदारों ने कालाबाजारी का एक पूरा नेक्सस तैयार कर लिया है। आरोप है कि स्टॉक होने के बावजूद हितग्राहियों को घंटों लाइन में खड़ा रखा जाता है। कभी सर्वर डाउन होने की बात कही जाती है, तो कभी कहा जाता है कि ‘पहले से बहुत कार्ड पेंडिंग हैं’। दिनभर की जद्दोजहद के बाद थका-हारा हितग्राही जब टूट जाता है, तब दुकानदार अपना असली खेल शुरू करते हैं और उन्हें चावल के बदले पैसे का लालच देते हैं।
एक्सपोज़: ऐसे सामने आ रहे कालाबाजारी के मामले
लगातार रायपुर और धमतरी में चावल से भरी गाड़ियां पकड़े जाने के बाद इस खेल की परतें खुल रही हैं:
अधिकारियों का रटा-रटाया जवाब जिले में राशन गड़बड़ी के ये मामले लगातार सामने आ रहे हैं। हालांकि, खाद्य विभाग यदा-कदा कार्रवाई कर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर लेता है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि सिस्टम तब क्यों जागता है, जब गाड़ियां सड़क पर पकड़ाई जाती हैं?
"शिकायत मिलने पर हमारी ओर से लगातार कार्रवाई की जा रही है। बीच-बीच में टीम द्वारा दुकानों का औचक निरीक्षण भी किया जाता है। जहां भी स्टॉक में गड़बड़ी या चावल के बदले पैसे देने की बात सामने आती है, वहां नियमानुसार सख्त कार्रवाई होती है।" - भूपेंद्र मिश्रा, खाद्य नियंत्रक, रायपुर