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हक के चावल पर डाका: दुकानों से सीधे मिलों तक पहुंच रहा गरीबों का अनाज

06 Nov 2026 | WEENEWS DESK | 989 views
हक के चावल पर डाका: दुकानों से सीधे मिलों तक पहुंच रहा गरीबों का अनाज

चावल की कमी बताकर हितग्राहियों को लौटा रहे दुकानदार, मजबूरन लेना पड़ रहा नकद पैसा

रायपुर। सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत गरीब परिवारों को मिलने वाले सरकारी चावल की कालाबाजारी का बड़ा खेल एक बार फिर बेनकाब हुआ है। सिस्टम की आंखों में धूल झोंककर राशन दुकानों से हितग्राहियों को चावल देने के बजाय, इसे सीधे राइस मिलों में खपाया जा रहा है।

राजधानी रायपुर और आसपास के इलाकों में कई दुकानदार राशनकार्डधारियों को ‘चावल का स्टॉक नहीं है’ कहकर बैरंग लौटा रहे हैं। जो हितग्राही विरोध करते हैं, उन्हें राशन के बदले मामूली रकम देकर चलता किया जा रहा है। इसके बाद यही चावल गाड़ियों में भरकर रातों-रात मिलों के हवाले कर दिया जाता है। यह सीधे तौर पर हितग्राहियों के खाद्य सुरक्षा अधिकारों पर डकैती है।

हितग्राही परेशान, जानबूझकर कराते हैं इंतजार

दुकानदारों ने कालाबाजारी का एक पूरा नेक्सस तैयार कर लिया है। आरोप है कि स्टॉक होने के बावजूद हितग्राहियों को घंटों लाइन में खड़ा रखा जाता है। कभी सर्वर डाउन होने की बात कही जाती है, तो कभी कहा जाता है कि ‘पहले से बहुत कार्ड पेंडिंग हैं’। दिनभर की जद्दोजहद के बाद थका-हारा हितग्राही जब टूट जाता है, तब दुकानदार अपना असली खेल शुरू करते हैं और उन्हें चावल के बदले पैसे का लालच देते हैं।


किलो के बदले 20-22 रुपए देते हैं weenews की पड़ताल में चौंकाने वाला सच सामने आया है। दुकानदार हितग्राही को चावल देने के एवज में एक किलो के बदले में 20 से 22 रुपए थमा देते हैं। मजबूरन हितग्राही को खाली हाथ लौटने के बजाय ये पैसे लेने पड़ते हैं। फिर यही दुकानदार उस चावल को राइस मिलर्स को सप्लाई करते हैं, जिसके बदले मिलर्स उन्हें एक किलो के 30 रुपए या उससे अधिक का भुगतान करते हैं। बिना मेहनत के हर किलो पर 8 से 10 रुपये का यह मुनाफा इस काले कारोबार की मुख्य वजह है।


एक्सपोज़: ऐसे सामने आ रहे कालाबाजारी के मामले

लगातार रायपुर और धमतरी में चावल से भरी गाड़ियां पकड़े जाने के बाद इस खेल की परतें खुल रही हैं:

  • केस 1: पिछले माह ही दलदल सिवनी स्थित एक राशन दुकान पर बड़ी धांधली दिखी। यहां सरकारी चावल को पुरानी बोरियों में भरकर एक वाहन में लोड किया गया। इसके बाद पूरी गाड़ी को तिरपाल से ढंककर राइस मिल के लिए रवाना कर दिया गया। किसी को शक न हो, इसलिए बीच रास्ते में दो-तीन बोरियां एक ऑटो में भी शिफ्ट की गईं।
  • केस 2: शनिवार को ही ईदगाह भाटा इलाके से सरकारी पीडीएस का चावल लोड करके एक पिकअप धमतरी के रास्ते निकली। मुखबिर की सूचना पर कुछ लोगों ने इसका पीछा किया। गाड़ी जब धमतरी पहुंची और उसे रोककर पूछताछ की गई, तो घबराए हुए चालक ने सच उगल दिया। उसने कबूल किया कि वह यह गाड़ी रायपुर में ‘सोहेल’ नाम के व्यक्ति के पास से भरकर लाया है।

अधिकारियों का रटा-रटाया जवाब जिले में राशन गड़बड़ी के ये मामले लगातार सामने आ रहे हैं। हालांकि, खाद्य विभाग यदा-कदा कार्रवाई कर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर लेता है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि सिस्टम तब क्यों जागता है, जब गाड़ियां सड़क पर पकड़ाई जाती हैं?


"शिकायत मिलने पर हमारी ओर से लगातार कार्रवाई की जा रही है। बीच-बीच में टीम द्वारा दुकानों का औचक निरीक्षण भी किया जाता है। जहां भी स्टॉक में गड़बड़ी या चावल के बदले पैसे देने की बात सामने आती है, वहां नियमानुसार सख्त कार्रवाई होती है।" - भूपेंद्र मिश्रा, खाद्य नियंत्रक, रायपुर


WEENEWS DESK
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