बिलासपुर। CG NEWS: रेलवे में इस्तेमाल के बाद बेकार हो चुके लोहे, पुराने पुर्जों और दूसरे सामान को अक्सर कबाड़ समझकर नीलाम कर दिया जाता है, लेकिन अब यही कबाड़ रेलवे कर्मचारियों की रचनात्मकता से कलाकृतियों में तब्दील हो रहा है। बेकार पड़े सामान से आकर्षक आकृतियां और सजावटी मॉडल तैयार किए जा रहे हैं।
इस पहल में रेलवे कर्मचारी अपने हुनर का इस्तेमाल कर अनुपयोगी सामग्री को नया जीवन दे रहे हैं। पिछले साल रायपुर के वैगन रिपेयर शॉप में स्क्रैप से भगवान गणेश की विशाल प्रतिमा तैयार की गई थी, जिसे लोगों ने खूब सराहा था। अब यह पहल रेलवे के कबाड़ को उपयोगी बनाने के साथ ही कर्मचारियों की कलात्मक प्रतिभा को भी सामने ला रही है।
रेलवे के गुड्स वैगन के पुराने पुर्जे हों, इस्तेमाल से बाहर हो चुके स्लीपर या फिर लोहे के दूसरे अनुपयोगी हिस्से, अब इनका इस्तेमाल सिर्फ कबाड़ के रूप में नहीं हो रहा है। रेलवे कर्मचारी अपनी कल्पनाशीलता और तकनीकी हुनर से इन्हें आकर्षक कलाकृतियों में बदल रहे हैं। पुराने लोहे से अलग-अलग आकृतियां, सजावटी सामान और मॉडल तैयार किए जा रहे हैं।
खास बात यह है कि जिन चीजों को बेकार समझकर हटा दिया जाता था, उन्हीं से अब ऐसी कलाकृतियां बनाई जा रही हैं, जो देखने में आकर्षक होने के साथ रेलवे की रचनात्मक सोच को भी दर्शाती हैं। पिछले साल रायपुर के वैगन रिपेयर शॉप में स्क्रैप से भगवान गणेश की बड़ी प्रतिमा तैयार की गई थी। इस अनूठे प्रयोग को लोगों की सराहना मिली थी। इसके अलावा पुराने लोहे से हथौड़े और सजावट में इस्तेमाल होने वाली कई तरह की आकृतियां भी बनाई जा रही हैं।
कबाड़ को कलाकृति में बदलने की यह पहल रेलवे में संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल की एक मिसाल बन रही है। इससे एक ओर अनुपयोगी सामग्री को नया उपयोग मिल रहा है, तो दूसरी ओर कर्मचारियों को अपनी रचनात्मक प्रतिभा दिखाने का अवसर भी मिल रहा है।
रेलवे का यह प्रयोग बताता है कि सही सोच और हुनर के साथ बेकार समझी जाने वाली चीजों से भी आकर्षक और उपयोगी वस्तुएं तैयार की जा सकती हैं। अब रेलवे का कबाड़ सिर्फ नीलामी तक सीमित नहीं, बल्कि रचनात्मकता की नई पहचान भी बन रहा है।