नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने पांच पूर्व CBI अधिकारियों के खिलाफ शुरू की गई कथित झूठी गवाही (Perjury) की कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगा दी है। कोर्ट ने 6 अक्टूबर 2026 को पारित अपने आदेश के पैराग्राफ 63 और 64 में दिए गए निर्देशों को अगली सुनवाई तक स्थगित रखने का आदेश दिया है। इस अंतरिम राहत का लाभ फरवरी 2027 तक जारी रहेगा। मामले की अगली सुनवाई 4 फरवरी 2027 को निर्धारित की गई है।
जस्टिस मिनी पुष्कर्णा की पीठ ने 2 नवंबर को इस मामले में सुनवाई की। दरअसल, पूर्व CBI अधिकारियों सुषिल दीवान और रमन त्यागी की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर 6 अक्टूबर को पारित आदेश को वापस लेने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि आदेश पारित करने से पहले उन्हें अपना पक्ष रखने का उचित अवसर नहीं दिया गया।
सुनवाई के दौरान यह भी दलील दी गई कि सुषिल दीवान को नोटिस गलत ई-मेल आईडी पर भेजा गया था। वहीं, CBI की ओर से भी आवेदकों की दलीलों का समर्थन किया गया। CBI ने अदालत को बताया कि पूर्व आदेश में अन्य आरोपियों के खिलाफ भी निर्देश दिए गए थे, जबकि उनमें से कई को न तो नोटिस जारी किया गया और न ही सुनवाई का अवसर मिला।
दूसरी ओर, अपीलकर्ता की ओर से याचिकाओं का विरोध करते हुए कहा गया कि आपराधिक मामलों में पारित फैसले की समीक्षा नहीं की जा सकती। इस मामले में CBI की ओर से सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) भी दाखिल किए जाने की जानकारी दी गई।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने माना कि मामले में कई महत्वपूर्ण कानूनी सवाल हैं, जिन पर आगे विचार करने की जरूरत है। अदालत ने आवेदकों का प्रथम दृष्टया मामला बनता हुआ माना और अंतरिम राहत देते हुए 6 अक्टूबर के आदेश के संबंधित निर्देशों को अगली सुनवाई तक स्थगित कर दिया।
अब इस मामले में 4 फरवरी 2027 को आगे सुनवाई होगी।