बिलासपुर। CG HIGH COURT : तलाक के एक मामले में पत्नी को समुचित तरीके से नोटिस दिए बिना फैमिली कोर्ट द्वारा एकतरफा तलाक की डिक्री पारित करने के मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अहम टिप्पणी की है। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने कहा कि किसी भी पक्ष को सुनवाई का उचित अवसर दिए बिना उसके खिलाफ आदेश पारित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अखबार में नोटिस प्रकाशित करना समन की तामील का अंतिम उपाय है।
जस्टिस पार्थ प्रतीम साहू और जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि अखबार में नोटिस प्रकाशित करने से पहले सामान्य तरीके से नोटिस की तामील का प्रयास किया जाना जरूरी है। जरूरत पड़ने पर संबंधित व्यक्ति के घर पर नोटिस चस्पा करने की प्रक्रिया भी पूरी की जानी चाहिए। दरअसल, सूरजपुर निवासी महिला के पति ने 9 जनवरी 2024 को हिंदू विवाह अधिनियम के तहत तलाक के लिए फैमिली कोर्ट में याचिका दायर की थी। फैमिली कोर्ट ने पत्नी के बताए पते पर पंजीकृत डाक के जरिए नोटिस भेजा, लेकिन पता सही नहीं होने के कारण नोटिस वापस लौट आया।
इसके बाद पति ने अखबार में नोटिस प्रकाशित कराने की मांग की। फैमिली कोर्ट ने इस मांग को मंजूर करते हुए 29 फरवरी 2024 को स्थानीय अखबार में नोटिस प्रकाशित कराया। बाद में पत्नी के कोर्ट में उपस्थित नहीं होने पर फैमिली कोर्ट ने 25 अप्रैल 2024 को एकतरफा तलाक की डिक्री पारित कर दी। मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) के आदेश 5 के नियम 17 और 20 का उल्लेख किया। कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड से यह सामने नहीं आता कि पत्नी के घर पर नोटिस चस्पा कराने का प्रयास किया गया था।
हाईकोर्ट ने कहा कि केवल एक बार नोटिस वापस आने के बाद सीधे अखबार में नोटिस प्रकाशित करने का आदेश देना उचित प्रक्रिया नहीं है। इसके बावजूद फैमिली कोर्ट ने यह मान लिया कि पत्नी जानबूझकर नोटिस की तामील से बच रही थी, जबकि रिकॉर्ड में ऐसा निष्कर्ष निकालने के लिए पर्याप्त आधार मौजूद नहीं था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अखबार में नोटिस प्रकाशित करना समन की तामील का आखिरी विकल्प है। इससे पहले नोटिस पहुंचाने के सामान्य सभी जरूरी प्रयास किए जाने चाहिए।
पत्नी की ओर से बताया गया कि उसे तलाक की कार्यवाही के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। उसके अनुसार, 18 नवंबर 2024 को औरंगाबाद में चल रहे भरण-पोषण के मामले की काउंसलिंग के दौरान उसे पहली बार तलाक की डिक्री के बारे में जानकारी मिली और उसकी प्रति दिखाई गई। इसके बाद पत्नी ने डिक्री की प्रमाणित प्रति प्राप्त की और 2 दिसंबर 2024 को एकतरफा तलाक की डिक्री रद्द करने के लिए आवेदन दायर किया।
हाईकोर्ट ने एकतरफा तलाक की डिक्री को चुनौती देने में हुई देरी को माफ करने की पत्नी की अर्जी स्वीकार कर ली। साथ ही फैमिली कोर्ट के 23 जून 2025 के आदेश को रद्द करते हुए मामले को नए सिरे से विचार के लिए वापस भेज दिया।
अब फैमिली कोर्ट पत्नी की ओर से एकतरफा तलाक की डिक्री रद्द करने के लिए दायर आवेदन पर नए सिरे से सुनवाई करेगा। हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों को 12 अक्टूबर को फैमिली कोर्ट में उपस्थित होने का निर्देश दिया है।