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BIG NEWS : लालकिला कार बम ब्लास्ट में AI का हुआ था दुरुपयोग, आरोपियों ने यूट्यूब और चैटजीपीटी से सीखा था बम बनाना, NIA के खुलासे में Flipkart का भी जिक्र

25 May 2026 | JAY SHANKAR PANDEY | 2 views
BIG NEWS : लालकिला कार बम ब्लास्ट में AI का हुआ था दुरुपयोग, आरोपियों ने यूट्यूब और चैटजीपीटी से सीखा था बम बनाना, NIA के खुलासे में Flipkart का भी जिक्र

नई दिल्ली। BIG NEWS : दिल्ली में लालकिला कार बम धमाके के आरोपियों ने इस साजिश को अंजाम देने के लिए एआई का दुरुपयोग किया था। एनआईए की जांच में यह बात सामने आई है कि हमले के आरोपियों ने बम बनाने के लिए यूट्यूब और चैटजीपीटी से तकनीकी सीखी और इस्तेमाल किया था। आरोपियों ने रॉकेट-आधारित इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) बनाए थे और जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले के काजीगुंड के जंगलों में उनका परीक्षण भी किया था।

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की ओर से हाल ही में दायर 7,500 पन्नों के आरोपपत्र में वैश्विक आतंकवादी संगठन अल-कायदा से जुड़े समूह के एक आरोपी की करतूतों का ब्योरा देते हुए यह खुलासा किया गया है। अधिकृत सूत्रों ने रविवार को बताया कि पिछले साल 10 नवंबर को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में हुए शक्तिशाली आईईडी धमाके के मामले में दायर आरोपपत्र में विस्तार से बताया गया है कि आरोपियों ने कैसे प्रयोगशाला स्तरीय तरीका अपनाकर आईईडी बनाए और उनका इस्तेमाल किया। आरोपपत्र में नामजद आरोपियों में एक जसीर बिलाल वानी का नाम अल-कायदा से जुड़े आतंकी संगठन अंसार गजवत-उल-हिंद के अंतरिम आतंकी मॉड्यूल के इन-हाउस इंजीनियर के तौर पर सामने आया है।

एनआईए जांच में पाया गया कि जसीर बिलाल वानी इस साजिश के लिए तकनीकी सहायता मुहैया कराने के मकसद से वर्ष 2024-25 के दौरान दो से तीन बार हरियाणा के फरीदाबाद स्थित अल फलाह यूनिवर्सिटी परिसर में रुका था। इस यूनिवर्सिटी में कार्यरत तीन डॉक्टरों पर इस धमाके में शामिल होने का आरोप है। जांच में पता चला कि साजिशकर्ताओं में शामिल डॉ. अदील अहमद राथर ने जसीर का परिचय डॉ. उमर उन नबी से कराया था। मुख्य आरोपी डॉ. उमर उन नबी ही धमाके में इस्तेमाल विस्फोटक-लदी कार चला रहा था। अदील ने जासिर को एपीके के रूप में पोटेशियम नाइट्रेड समेत आईईडी बनाने का अन्य सामान मुहैया कराया। जासिर ने यूट्यूब और चैटजीपी का सहारा लेकर रॉकेट कैसे बनाया जाए और उसमें इस्तेमाल होने वाले मिश्रण का अनुपात क्या होना चाहिए, जैसी जानकारियां जुटाईं।

जांच टीम के सामने दिखाया अपना कारनामा :

सूत्रों के अनुसार, जांच के सिलसिले में एनआईए की तरफ से आयोजित एक नियंत्रित सिमुलेशन के दौरान जासिर ने बम निरोधक दस्ते के विशेषज्ञों की टीम के सामने यह साबित कर दिखाया कि बाजार में आसानी से उपलब्ध होने वाली चीजों का इस्तेमाल करके भी पूरी तरह से काम करने वाले रॉकेट आईईडी तैयार कर सकता है। सूत्रों ने यह भी बताया कि जांच में सामने आई सबसे चौंकाने वाली फोरेंसिक जानकारी वह थी जिसका इस्तेमाल डॉ. उमर द्वारा इस्तेमाल किए गए वाहन में लगी आईईडी को सक्रिय करने से जुड़ी थी।

फ्लिपकार्ट से मंगाया साजिश में इस्तेमाल सामान :
जांच में यह भी पता चला है कि जासिर ने दिसंबर 2023 से जनवरी 2024 के बीच अपने फ्लिपकार्ट अकाउंट से कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण मंगवाए थे। इनमें सेंसर इंडक्टिव प्रॉक्सिमिटी स्विच, हीट गन, पीजो प्लेट, रिमोट कंट्रोल रिले-स्विच आएफ (रेडियो फ्रिक्वेंसी) ट्रांसमीटर और रिसीवर किट, फ्लेमलेस रिचार्जेबल पॉकेट लाइटर, सोल्डरिंग किट और एलईडी इलेक्ट्रॉनिक किट शामिल थे। इन सामानों की खरीद के लिए पैसा डॉ. उमर ने दिया था। बाद में, जासिर ने इन पुर्जों को जोड़कर डॉ. उमर को सौंप दिया। डॉ. उमर ने इसी ट्रिगर मैकेनिज्म का इस्तेमाल करके कार में लगाई गई आईईडी में धमाका किया।

कश्मीर में किया था परीक्षण
आरोपपत्र के मुताबिक, जासिर ने कथित तौर पर रॉकेट आईईडी तैयार किए और डॉ. उमर, डॉ. मुजम्मिल शकील और अन्य सह-आरोपियों के साथ मिलकर काजीगुंड के जंगलों में उनका परीक्षण किया। जासिर की तरफ से दी गई जानकारियों के आधार पर एनआईए की टीमों ने गहन जांच-पड़ताल के दौरान घने जंगलों के भीतर अंदर से इन उपकरणों के अवशेष बरामद किए हैं।

सिलिंडर और ड्रोन हमले करने की भी रची थी साजिश
डॉ. उमर ने जासिर को दो ड्रोन दिए थे और इनकी उड़ान और पेलोड क्षमता को बेहतर बनाने के निर्देश भी दिए थे। जांच में यह भी सामने आया है कि उनकी योजना इन ड्रोनों में विस्फोटक लगाकर उन्हें हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने की थी, ताकि कश्मीर और देश के अन्य हिस्सों में मौजूद सुरक्षा प्रतिष्ठानों पर हमले किए जा सकें। आरोपपत्र में एक अन्य घटना का भी जिक्र है, जिसके अनुसार, आरोपियों ने अनंतनाग के मट्टन के पास जंगलों में एक सिलिंडर-आधारित आईईडी का परीक्षण किया था। इसमें डॉ. उमर, जासिर, डॉ. मुजम्मिल और डॉ. अदील शामिल थे। डॉ. अदील की बताई जगहों से एनआईए की टीमों ने इन परीक्षणों के अवशेष बरामद कर लिए।

JAY SHANKAR PANDEY
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