नई दिल्ली। Kharge Controversy: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर की गई कथित टिप्पणी को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने मोर्चा खोल दिया है। राज्यसभा में भाजपा के छह सांसदों ने खड़गे पर संसद की गरिमा और संसदीय परंपराओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाते हुए विशेषाधिकार हनन नोटिस दाखिल किया है। मामले को गंभीर मानते हुए राज्यसभा सभापति ने इसे जांच और रिपोर्ट के लिए विशेषाधिकार समिति के पास भेज दिया है।
इस घटनाक्रम के बाद संसद के भीतर और बाहर सियासी माहौल गर्म हो गया है। भाजपा का आरोप है कि नेता प्रतिपक्ष जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक पद पर बैठे मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अपमानजनक और असंसदीय भाषा का इस्तेमाल किया, जो संसदीय मर्यादा के खिलाफ है।
जानकारी के अनुसार भाजपा सांसद बृजलाल, मिथिलेश कुमार, सुमित्रा बाल्मिक, शिवेश कुमार, सिकंदर कुमार और नागेंद्र राय ने संयुक्त रूप से यह विशेषाधिकार हनन नोटिस राज्यसभा सभापति को सौंपा है। सांसदों का कहना है कि खड़गे की टिप्पणियां न केवल प्रधानमंत्री पद की गरिमा को प्रभावित करती हैं, बल्कि संसद और उसके सदस्यों की प्रतिष्ठा को भी नुकसान पहुंचाती हैं।
नोटिस में कहा गया है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है और ऐसे पद पर बैठे व्यक्ति से जिम्मेदार, संयमित और मर्यादित भाषा की अपेक्षा की जाती है। भाजपा सांसदों ने आरोप लगाया कि खड़गे ने बार-बार ऐसी टिप्पणियां की हैं जो संसदीय परंपराओं के अनुरूप नहीं हैं।
राज्यसभा सचिवालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने 16 जून 2026 को राज्यसभा के नियम 203 के तहत इस मामले को विशेषाधिकार समिति को भेजने का निर्णय लिया। अब समिति पूरे मामले की जांच करेगी और तथ्यों का परीक्षण करने के बाद अपनी रिपोर्ट सभापति को सौंपेगी।
विशेषाधिकार समिति यह जांच करेगी कि खड़गे द्वारा की गई टिप्पणियां वास्तव में सदन के विशेषाधिकारों और संसदीय मर्यादाओं का उल्लंघन करती हैं या नहीं। समिति की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
संसद में विशेषाधिकार हनन नोटिस एक महत्वपूर्ण संसदीय प्रक्रिया है। राज्यसभा की कार्यवाही एवं कामकाज संचालन नियमावली के नियम 188 के तहत कोई भी सांसद सदन की गरिमा, विशेषाधिकार या संसदीय परंपराओं के उल्लंघन से जुड़े मामलों में नोटिस दे सकता है।
यदि सभापति को मामला प्रथम दृष्टया गंभीर लगता है, तो उसे विशेषाधिकार समिति के पास भेजा जाता है। समिति जांच के बाद अपनी सिफारिशें देती है, जिसके आधार पर सदन आगे की कार्रवाई करता है।
राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश विशेषाधिकार समिति के अध्यक्ष हैं। समिति में भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी, दीपक प्रकाश, सुमेर सिंह सोलंकी, सुरेंद्र सिंह नगर, मनन कुमार मिश्रा तथा निर्दलीय सांसद कार्तिकेय शर्मा समेत अन्य सदस्य शामिल हैं।
समिति मामले के सभी पहलुओं की समीक्षा करेगी और यह तय करेगी कि खड़गे की टिप्पणी संसदीय विशेषाधिकारों के उल्लंघन की श्रेणी में आती है या नहीं।
खड़गे के खिलाफ विशेषाधिकार हनन नोटिस दाखिल होने के बाद राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है। भाजपा जहां इसे संसद की गरिमा से जुड़ा मामला बता रही है, वहीं कांग्रेस की ओर से इस पर प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।
अब सभी की नजर विशेषाधिकार समिति की जांच और उसकी रिपोर्ट पर टिकी हुई है, क्योंकि उसी के आधार पर यह तय होगा कि इस मामले में आगे क्या कार्रवाई की जाएगी।