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कारगिल में PAK को धोया, ऑपरेशन सिंदूर में संभाली कमान, सर्वोच्च युद्ध सेवा मेडल से सम्मानित… जानिए कौन हैं राम मंदिर के नए CEO

02 Sep 2026 | WEENEWS DESK | 807 views
कारगिल में PAK को धोया, ऑपरेशन सिंदूर में संभाली कमान, सर्वोच्च युद्ध सेवा मेडल से सम्मानित… जानिए कौन हैं राम मंदिर के नए CEO

नई दिल्ली। Ram Mandir Trust: अयोध्या के भव्य राम मंदिर से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। राम मंदिर ट्रस्ट ने रिटायर्ड एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा को ट्रस्ट का नया CEO नियुक्त किया है। बुधवार को हुई ट्रस्ट की बैठक में उनके नाम पर मुहर लगाई गई। करीब चार दशक तक भारतीय वायुसेना में सेवाएं देने वाले जीतेंद्र मिश्रा का सैन्य करियर बेहद महत्वपूर्ण अभियानों और जिम्मेदारियों से जुड़ा रहा है।

कारगिल युद्ध के दौरान ऑपरेशन सफेद सागर से लेकर हाल के ऑपरेशन सिंदूर तक वह भारतीय वायुसेना की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का हिस्सा रहे। युद्ध और रणनीतिक अभियानों में उनके अनुभव को देखते हुए राम मंदिर ट्रस्ट में उनकी नई भूमिका को काफी अहम माना जा रहा है।

कारगिल युद्ध में मिराज-2000 से किया था हमला

जीतेंद्र मिश्रा का नाम भारतीय वायुसेना के उन अधिकारियों में शामिल रहा है, जिन्होंने कारगिल युद्ध के दौरान महत्वपूर्ण ऑपरेशनल जिम्मेदारियां निभाईं।

1999 में कारगिल युद्ध के दौरान चलाए गए ऑपरेशन सफेद सागर में वह मिराज-2000 से जुड़े ऑपरेशनल मिशन का हिस्सा थे। उस समय भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तानी सेना की महत्वपूर्ण पोजीशन को निशाना बनाने के लिए मिराज-2000 लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल किया था।

जीतेंद्र मिश्रा उस टीम का हिस्सा रहे जिसने कारगिल युद्ध के शुरुआती दौर में मिराज-2000 विमानों पर लेजर गाइडेड बमों को ऑपरेशनल बनाया। बाद में इन हथियारों का इस्तेमाल टाइगर हिल और मुंथो ढालो जैसे इलाकों में पाकिस्तानी ठिकानों के खिलाफ किए गए हमलों में हुआ।

40 साल का शानदार सैन्य करियर

जीतेंद्र मिश्रा ने 6 दिसंबर 1986 को एयर फोर्स एकेडमी से भारतीय वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम में अपना करियर शुरू किया था। लगभग चार दशक के करियर में उन्होंने 3,000 घंटे से ज्यादा उड़ान का अनुभव हासिल किया।

खास बात यह है कि उन्होंने 18 से ज्यादा प्रकार के लड़ाकू विमान, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और हेलीकॉप्टर उड़ाए हैं। उनका अनुभव केवल फाइटर पायलट तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वायुसेना की ऑपरेशनल प्लानिंग और टेस्टिंग से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी उन्होंने संभालीं।

उन्होंने एयरक्राफ्ट एंड सिस्टम्स टेस्टिंग एस्टेब्लिशमेंट में चीफ टेस्ट पायलट के तौर पर काम किया। इसके अलावा एयर हेडक्वार्टर में ऑपरेशन प्लानिंग एंड असेसमेंट ग्रुप के डायरेक्टर की जिम्मेदारी भी संभाली।

ऑपरेशन सिंदूर में भी अहम भूमिका

जीतेंद्र मिश्रा के सैन्य करियर में ऑपरेशन सिंदूर भी एक महत्वपूर्ण अध्याय रहा है। 1 जनवरी 2025 को उन्हें भारतीय वायुसेना की वेस्टर्न कमांड का कमांडिंग इन चीफ बनाया गया था। यह कमांड पाकिस्तान से लगी पश्चिमी सीमा की सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है।

पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने 6-7 मई 2025 की रात ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। इस अभियान के दौरान भारतीय सेना और वायुसेना ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया।

इस पूरे घटनाक्रम के दौरान जीतेंद्र मिश्रा की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही। ऑपरेशन के दौरान भारतीय एयर डिफेंस सिस्टम, रणनीतिक योजना और पाकिस्तान की गतिविधियों पर नजर रखने से जुड़े कई पहलुओं पर उन्होंने बाद में भी जानकारी साझा की।

S-400 को लेकर पाकिस्तान क्यों था परेशान?

ऑपरेशन सिंदूर के बाद एक इंटरव्यू में जीतेंद्र मिश्रा ने भारतीय S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की भूमिका को लेकर भी कई अहम बातें बताई थीं।

उन्होंने बताया था कि पाकिस्तान भारतीय S-400 सिस्टम की लोकेशन का पता लगाने के लिए काफी प्रयास कर रहा था। इसके लिए उसने अलग-अलग माध्यमों का इस्तेमाल करने की कोशिश की। उनके मुताबिक, पाकिस्तान को दूसरे देशों से सैटेलाइट के जरिए भी मदद मिल रही थी और भारत के भीतर जासूसों तथा स्लीपर सेल को सक्रिय करने की कोशिश की गई।

जीतेंद्र मिश्रा के मुताबिक, S-400 पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक था। उन्होंने बताया कि जब पाकिस्तानी विमान भारतीय हवाई क्षेत्र की ओर आते थे तो भारतीय एयर डिफेंस सिस्टम उनके लिए बड़ा खतरा बन जाता था।

314 किलोमीटर दूर लक्ष्य को बनाया निशाना

ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ी अपनी बातचीत में जीतेंद्र मिश्रा ने S-400 की क्षमता का एक उदाहरण भी बताया था।

उन्होंने बताया कि पाकिस्तानी एयरबोर्न रडार सिस्टम भारतीय ऑपरेशन का पता लगाने की कोशिश कर सकता था। इसी दौरान S-400 ऑपरेटर ने आने वाले लक्ष्य पर कार्रवाई की अनुमति मांगी।

जीतेंद्र मिश्रा के अनुसार, उन्होंने ऑपरेटर को कार्रवाई की अनुमति दी और इसके बाद करीब 314 किलोमीटर की दूरी पर लक्ष्य को मार गिराया गया। यह घटना ऑपरेशन के दौरान भारतीय एयर डिफेंस सिस्टम की क्षमता और उसकी रणनीतिक भूमिका को दर्शाने वाले उदाहरणों में गिनी जाती है।

कई बड़े सैन्य सम्मानों से हो चुके हैं सम्मानित

देश की सुरक्षा और सैन्य अभियानों में योगदान के लिए जीतेंद्र मिश्रा को कई प्रतिष्ठित सैन्य सम्मानों से नवाजा जा चुका है।

उन्हें 2025 में सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल से सम्मानित किया गया था। इससे पहले 2024 में अति विशिष्ट सेवा मेडल (AVSM) और 2013 में विशिष्ट सेवा मेडल (VSM) भी मिल चुका है।

इन सम्मानों से उनके लंबे और उल्लेखनीय सैन्य करियर का अंदाजा लगाया जा सकता है।

एयर मार्शल से अब राम मंदिर ट्रस्ट के CEO तक

वायुसेना में लंबे समय तक महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालने के बाद अब जीतेंद्र मिश्रा की नई पारी राम मंदिर ट्रस्ट के साथ शुरू होने जा रही है।

राम मंदिर का निर्माण और उससे जुड़ी व्यवस्थाएं लगातार विस्तार ले रही हैं। ऐसे में एक अनुभवी और उच्च स्तर के प्रशासनिक एवं रणनीतिक अनुभव वाले पूर्व सैन्य अधिकारी की नियुक्ति को महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

राम मंदिर केवल धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि अयोध्या के तेजी से विकसित हो रहे धार्मिक और पर्यटन ढांचे का भी प्रमुख हिस्सा है। हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु अयोध्या पहुंच रहे हैं। ऐसे में मंदिर ट्रस्ट के सामने सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन, प्रशासन, सुविधाओं के विस्तार और विभिन्न परियोजनाओं के संचालन जैसी कई बड़ी जिम्मेदारियां हैं।

ऐसे समय में करीब 40 वर्षों के सैन्य अनुभव वाले जीतेंद्र मिश्रा को CEO की जिम्मेदारी मिलना ट्रस्ट के लिए एक अहम प्रशासनिक बदलाव माना जा रहा है।

युद्धभूमि से राम मंदिर की जिम्मेदारी तक का सफर

जीतेंद्र मिश्रा का करियर इसलिए भी खास है क्योंकि इसमें भारतीय वायुसेना के कई महत्वपूर्ण अध्याय जुड़े हुए हैं। एक तरफ उन्होंने कारगिल युद्ध के दौरान दुश्मन के ठिकानों पर कार्रवाई में भूमिका निभाई, वहीं दूसरी तरफ ऑपरेशन सिंदूर जैसे आधुनिक सैन्य अभियान में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली।

अब यही अनुभवी अधिकारी राम मंदिर ट्रस्ट के CEO के रूप में नई जिम्मेदारी संभालेंगे। उनके सामने मंदिर से जुड़ी व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने तथा ट्रस्ट की विभिन्न गतिविधियों को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने की चुनौती होगी।

यानी जिस अधिकारी ने अपने करियर का बड़ा हिस्सा देश की सीमाओं और सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालते हुए बिताया, अब वह अयोध्या में राम मंदिर की व्यवस्थाओं और ट्रस्ट के कामकाज को आगे बढ़ाने में अपनी विशेषज्ञता का इस्तेमाल करेंगे।


WEENEWS DESK
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