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Google Maps से स्कूल की किताबों तक… UN के नए नक्शे में भारत के लिए क्या बदलेगा?

06 Sep 2026 | WEENEWS DESK | 875 views
Google Maps से स्कूल की किताबों तक… UN के नए नक्शे में भारत के लिए क्या बदलेगा?

World Map News: दुनिया का नक्शा सिर्फ देशों की सीमाएं और उनकी भौगोलिक स्थिति बताने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह इस बात को भी प्रभावित करता है कि लोग दुनिया को किस तरह देखते और समझते हैं। लंबे समय से इस्तेमाल हो रहे Mercator Projection को लेकर इसकी भौगोलिक सटीकता पर सवाल उठते रहे हैं। अब अधिक वास्तविक क्षेत्रफल दिखाने वाले Equal-Area Map Projections को बढ़ावा देने की चर्चा ने एक बार फिर नक्शों को लेकर बहस तेज कर दी है।

पहली नजर में सवाल उठता है कि नक्शे का प्रोजेक्शन बदलने से भारत के लिए आखिर क्या बदलेगा? देश की सीमाएं वही रहेंगी, क्षेत्रफल भी नहीं बदलेगा। लेकिन स्कूल की किताबों, एटलस, डिजिटल मैप्स और दुनिया के देशों को देखने की हमारी समझ पर इसका असर जरूर पड़ सकता है।

1569 में जेरार्डस मर्केटर द्वारा विकसित Mercator Projection मूल रूप से समुद्री यात्राओं और नेविगेशन के लिए बेहद उपयोगी था। इसकी खासियत यह थी कि दिशा और कोणों को इस तरह दिखाया जाता था कि समुद्री यात्राओं के लिए इसका इस्तेमाल आसान हो सके।

लेकिन इसकी एक बड़ी सीमा भी है। भूमध्य रेखा से जैसे-जैसे किसी क्षेत्र की दूरी बढ़ती है, नक्शे पर उसका आकार वास्तविक क्षेत्रफल की तुलना में ज्यादा बड़ा दिखाई देने लगता है।

इसी वजह से ग्रीनलैंड जैसे क्षेत्र नक्शे पर बेहद बड़े नजर आते हैं, जबकि वास्तविक क्षेत्रफल में अफ्रीका उससे कई गुना बड़ा है। इसी तरह उत्तरी गोलार्ध के कई देश अपने वास्तविक आकार से बड़े दिखाई देते हैं।

भारत का आकार भी Mercator Projection में वास्तविक क्षेत्रफल के अनुपात में बिल्कुल सटीक नजर नहीं आता। हालांकि ग्रीनलैंड और अफ्रीका जैसा अंतर भारत के मामले में उतना बड़ा नहीं है।

Equal-Area Projection का उद्देश्य देशों और महाद्वीपों को उनके वास्तविक क्षेत्रफल के अधिक करीब दिखाना है। ऐसे नक्शों में भारत, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका जैसे क्षेत्रों का आकार दुनिया के दूसरे हिस्सों के मुकाबले ज्यादा संतुलित दिखाई देगा।

इसका मतलब यह नहीं है कि भारत बड़ा हो जाएगा। बदलाव केवल इस बात में होगा कि नक्शे पर भारत को किस अनुपात में दिखाया जाता है।

नए प्रकार के मानचित्रों का इस्तेमाल बढ़ा तो इसका सबसे स्पष्ट असर भूगोल की किताबों और एटलस में दिखाई दे सकता है।

बच्चे जिस नक्शे को देखकर दुनिया के देशों को समझते हैं, उसी से उनके मन में देशों के आकार और उनके आपसी अनुपात की तस्वीर बनती है। अधिक क्षेत्रफल-सटीक नक्शे अपनाए जाने पर विद्यार्थियों को अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका, भारत और अन्य देशों का वास्तविक आकार बेहतर तरीके से समझने में मदद मिल सकती है।

यानी बदलाव सिर्फ कागज पर बने नक्शे में नहीं होगा, बल्कि दुनिया के भौगोलिक अनुपात को समझने के तरीके में भी हो सकता है।

यह सवाल सबसे ज्यादा लोगों के मन में है। लेकिन यहां मामला थोड़ा अलग है।

Google Maps और दूसरे डिजिटल मैपिंग प्लेटफॉर्म अलग-अलग कामों के लिए अलग-अलग प्रोजेक्शन का इस्तेमाल कर सकते हैं। ऑनलाइन मैप्स में Web Mercator का इस्तेमाल लंबे समय से लोकप्रिय रहा है, क्योंकि यह डिजिटल मैप्स और नेविगेशन के लिए व्यावहारिक है।

इसलिए किसी नए क्षेत्रफल-सटीक मानचित्र को बढ़ावा मिलने का मतलब यह नहीं है कि Google Maps या दूसरी नेविगेशन सेवाएं तुरंत अपना पूरा सिस्टम बदल देंगी।

संभावना ज्यादा यह है कि शैक्षणिक, सांख्यिकीय और दुनिया के आकार को समझाने वाले नक्शों में Equal-Area Projection का इस्तेमाल बढ़े।

नक्शे हमारी भौगोलिक समझ बनाने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। जब किसी देश को बार-बार नक्शे पर बड़ा या छोटा देखा जाता है तो उसके आकार को लेकर हमारी धारणा भी उसी के अनुसार बन सकती है।

Mercator Projection की सबसे बड़ी आलोचना यही रही है कि उत्तरी और दक्षिणी ध्रुवों की ओर जाने पर क्षेत्र काफी ज्यादा बड़ा दिखाई देने लगता है। इसके मुकाबले Equal-Area Maps क्षेत्रफल को ज्यादा वास्तविक अनुपात में दिखाने की कोशिश करते हैं।

इसलिए नए मानचित्रों का इस्तेमाल बढ़ने पर दुनिया के देशों को देखने की भौगोलिक तस्वीर ज्यादा संतुलित हो सकती है।

भारत के लिए इसका महत्व सिर्फ इतना नहीं है कि नक्शे पर देश का आकार थोड़ा अलग नजर आएगा। भारत समेत एशिया, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका के कई देशों को लंबे समय से ऐसे नक्शों में देखा जाता रहा है, जिनमें उत्तरी गोलार्ध के देशों का आकार अपेक्षाकृत ज्यादा बड़ा दिखाई देता है।

अगर भविष्य में अधिक क्षेत्रफल-सटीक मानचित्रों का इस्तेमाल बढ़ता है तो ग्लोबल साउथ के देशों की वास्तविक भौगोलिक स्थिति ज्यादा स्पष्ट तरीके से सामने आ सकती है।

हालांकि यह बदलाव भारत की सीमाओं, क्षेत्रफल या राजनीतिक स्थिति को बिल्कुल नहीं बदलता। यह केवल दुनिया को नक्शे पर किस तरह प्रस्तुत किया जाता है, उससे जुड़ा बदलाव है।

भारत की जमीन नहीं बढ़ेगी, सीमा नहीं बदलेगी और देश का वास्तविक क्षेत्रफल भी वही रहेगा। बदलाव सिर्फ नक्शे में दिखाई देने वाले अनुपात का होगा। अगर अधिक सटीक क्षेत्रफल वाले मानचित्रों को व्यापक रूप से अपनाया जाता है, तो आने वाली पीढ़ियां दुनिया के देशों को उनके वास्तविक आकार के ज्यादा करीब देखकर समझ सकेंगी।


WEENEWS DESK
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