मुंबई। 14 साल पहले निर्देशक Homi Adajania ने ‘कॉकटेल’ के जरिए आधुनिक रिश्तों, दोस्ती और प्यार की उलझनों को बड़े पर्दे पर पेश किया था। अब ‘कॉकटेल 2’ के साथ वह फिर लौटे हैं। इस बार कहानी में Shahid Kapoor, Kriti Sanon और Rashmika Mandanna की तिकड़ी है, जो प्यार, दोस्ती, आकर्षण और भावनात्मक उलझनों के बीच फंसी दिखाई देती है। फिल्म आज 19 जून को रिलीज हुई है और शुरुआती दर्शकों की प्रतिक्रिया मिश्रित नजर आ रही है।
कहानी: प्यार और दोस्ती के बीच फंसी जिंदगी
फिल्म की कहानी कुणाल (शाहिद कपूर), दिया (रश्मिका मंदाना) और एली (कृति सेनन) के इर्द-गिर्द घूमती है। कुणाल और दिया का रिश्ता वर्षों पुराना है, लेकिन उनकी जिंदगी में एली की एंट्री सब कुछ बदल देती है। दोस्ती, आकर्षण और भावनाओं की सीमाएं धुंधली होने लगती हैं और तीनों किरदार एक ऐसे मोड़ पर पहुंच जाते हैं जहां किसी एक का फैसला बाकी दो की जिंदगी बदल सकता है।
कहानी की सबसे बड़ी ताकत इसके रिश्तों की जटिलता है, लेकिन कई जगह स्क्रिप्ट खुद को दोहराती हुई भी महसूस होती है। कुछ मोड़ अनुमानित हैं, जबकि कुछ भावनात्मक दृश्य असर छोड़ते हैं।
निर्देशन: होमी अदजानिया का स्टाइल बरकरार, लेकिन जादू अधूरा
होमी अदजानिया ने एक बार फिर आधुनिक रिश्तों को अपने खास अंदाज में पेश करने की कोशिश की है। फिल्म की लोकेशन, विजुअल ट्रीटमेंट और किरदारों की लाइफस्टाइल काफी आकर्षक लगती है। कई फ्रेम पोस्टकार्ड जैसे खूबसूरत दिखाई देते हैं। हालांकि पहले ‘कॉकटेल’ की तरह यहां भावनात्मक गहराई हर जगह महसूस नहीं होती।
फिल्म का पहला हाफ हल्का-फुल्का और मनोरंजक है, लेकिन दूसरे हाफ में कहानी कुछ जगह खिंची हुई महसूस होती है।
शाहिद कपूर: संभली हुई परफॉर्मेंस
शाहिद कपूर ने कुणाल के किरदार में संतुलित अभिनय किया है। वे फिल्म के भावनात्मक हिस्सों में अच्छे लगते हैं और रोमांटिक दृश्यों में उनकी स्क्रीन प्रेजेंस मजबूत है। हालांकि किरदार को उतनी परतें नहीं मिलीं जितनी कभी सैफ अली खान के गौतम को मिली थीं।
कृति सेनन: फिल्म की सबसे बड़ी ताकत
अगर फिल्म में कोई सबसे ज्यादा प्रभावित करता है तो वह कृति सेनन हैं। एली के रूप में उनका आत्मविश्वास, भावनात्मक संघर्ष और बेपरवाह अंदाज स्क्रीन पर छा जाता है। सोशल मीडिया पर भी सबसे ज्यादा तारीफ कृति की ही हो रही है। कई दर्शकों ने माना कि उन्होंने फिल्म का भार अपने कंधों पर उठा लिया।
रश्मिका मंदाना: सादगी और संवेदनशीलता
रश्मिका ने दिया के किरदार में सादगी और भावनात्मक मजबूती दिखाई है। उनका किरदार कहानी में संतुलन बनाकर रखता है। कई दृश्यों में वह प्रभाव छोड़ती हैं, हालांकि स्क्रिप्ट उन्हें और अधिक स्पेस दे सकती थी।
संगीत और गाने: अच्छी धुनें, लेकिन ‘तुम ही हो बंधु’ वाला जादू नहीं
पहली ‘कॉकटेल’ की सबसे बड़ी ताकत उसका संगीत था। “तुम ही हो बंधु”, “दारू देसी” और “सेकंड हैंड जवानी” जैसे गाने आज भी प्लेलिस्ट में मौजूद हैं।
‘कॉकटेल 2’ का म्यूजिक सुनने में अच्छा लगता है और फिल्म के माहौल को सपोर्ट करता है, लेकिन कोई ऐसा गाना नहीं जो रिलीज के पहले दिन ही कल्ट बनने की क्षमता दिखाए। बैकग्राउंड स्कोर बेहतर है, मगर एल्बम पहली फिल्म के स्तर तक नहीं पहुंच पाता।
दर्शकों का फैसला
सोशल मीडिया पर फिल्म को लेकर राय बंटी हुई है। कुछ लोग इसे फ्रेश रोमांटिक एंटरटेनर बता रहे हैं, जबकि कुछ दर्शकों का कहना है कि यह पहले भाग की बराबरी नहीं कर पाती। हालांकि लगभग हर प्रतिक्रिया में कृति सेनन के अभिनय की तारीफ जरूर दिखाई दे रही है।
अंतिम फैसला
अगर आप रोमांटिक ड्रामा, खूबसूरत लोकेशन, रिश्तों की उलझन और शाहिद-कृति-रश्मिका की केमिस्ट्री देखना चाहते हैं तो ‘कॉकटेल 2’ एक बार जरूर देख सकते हैं।
लेकिन अगर आप पहली ‘कॉकटेल’ जैसा भावनात्मक असर, यादगार संगीत और दिल में बस जाने वाली कहानी तलाश रहे हैं, तो यह फिल्म उस स्तर तक नहीं पहुंचती।
रेटिंग: 

☆ (3/5)
प्लस पॉइंट: कृति सेनन की शानदार परफॉर्मेंस, खूबसूरत विजुअल्स, अच्छी केमिस्ट्री
माइनस पॉइंट: कमजोर दूसरा हाफ, औसत संगीत, पहली फिल्म से लगातार तुलना