जांजगीर-चांपा। CG NEWS: जांजगीर-चांपा जिले के पामगढ़ परियोजना क्षेत्र से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो न केवल सरकारी व्यवस्था की पोल खोलती है, बल्कि उन जिम्मेदार अधिकारियों की संवेदनहीनता को भी उजागर करती है, जिनके कंधों पर नौनिहालों के भविष्य की जिम्मेदारी है। एक तरफ जिला कलेक्टर लगातार निरीक्षण कर आंगनबाड़ी केंद्रों को समय पर संचालित करने के निर्देश दे रहे हैं। दूसरी तरफ पामगढ़ परियोजना क्षेत्र में सुबह 7 बजे खुलने वाले आंगनबाड़ी केंद्रों में घंटों तक ताले लटके रहते हैं। मासूम बच्चे केंद्र के बाहर इंतजार करते हैं, भूख से बिलखते हैं। शिक्षा और पोषण की आस लगाए बैठे रहते हैं। लेकिन जिम्मेदार कर्मचारी और अधिकारी मानो गहरी नींद में सोए हुए हैं। आखिर क्यों कलेक्टर के आदेशों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। क्यों मासूमों के हक पर डाका डाला जा रहा है। और क्यों लापरवाही करने वालों पर कार्रवाई नहीं हो रही।
बता दे कि सरकार ने भीषण गर्मी को देखते हुए स्पष्ट आदेश जारी किया था कि आंगनबाड़ी केंद्र सुबह 7 बजे से 11 बजे तक संचालित होंगे। उद्देश्य साफ था। छोटे बच्चों को समय पर पोषण आहार मिले उन्हें प्रारंभिक शिक्षा मिले और कुपोषण जैसी गंभीर समस्या से बचाया जा सके। लेकिन पामगढ़ परियोजना क्षेत्र में सरकार के आदेश कागजों तक सीमित नजर आ रहे हैं। जमीनी हकीकत यह है कि कई केंद्रों में सुबह 7 बजे के बाद भी ताले लटके रहते हैं और मासूम बच्चे केंद्र के बाहर बैठकर कार्यकर्ता और सहायिका का इंतजार करते रहते हैं। जरा सोचिए वह नजारा कितना दर्दनाक होगा। जब नन्हे-नन्हे बच्चे अपने छोटे कदमों से आंगनबाड़ी पहुंचते हैं।
लेकिन वहां उनका स्वागत पोषण आहार या शिक्षा नहीं, बल्कि बंद दरवाजे और लटकते ताले करते हैं। इन मासूमों को क्या पता कि सरकारी आदेश क्या होते हैं। उन्हें तो बस इतना पता है कि उन्हें भूख लगी है, उन्हें पढ़ना है ,उन्हें सीखना है, लेकिन जिम्मेदार लोगों की लापरवाही उनके सपनों और अधिकारों पर ताला लगा रही है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर यह लापरवाही कब तक चलेगी। स्थानीय लोगों का आरोप है कि परियोजना क्षेत्र के कई केंद्रों में समय पर संचालन नहीं हो रहा है। इतना ही नहीं, इस पूरे मामले की जानकारी कई बार विभागीय अधिकारियों तक पहुंचाई जा चुकी है। इसके बावजूद स्थिति में कोई सुधार दिखाई नहीं दे रहा। जिससे यह सवाल और भी गहरा हो जाता है कि आखिर जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी के पीछे वजह क्या है। क्या यह लापरवाह कर्मचारियों को संरक्षण देने का मामला है।
या फिर बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ को जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है। एक तरफ जिला कलेक्टर लगातार निरीक्षण कर व्यवस्था सुधारने की कोशिश कर रहे हैं। दूसरी तरफ पामगढ़ परियोजना क्षेत्र में उन्हीं निर्देशों की खुलेआम अनदेखी होती दिखाई दे रही है। जिसका सीधा नुकसान उन मासूम बच्चों को उठाना पड़ रहा है जो पोषण, शिक्षा और देखभाल के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों पर निर्भर हैं। सरकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंद बच्चों तक पहुंचे, इसके लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं। लेकिन यदि केंद्र ही समय पर नहीं खुलेंगे तो योजनाओं का लाभ आखिर पहुंचेगा किसे।