जगदलपुर। CG NEWS: बस्तर की जीवनदायिनी इन्द्रावती नदी अब अपने किनारों को निगलती जा रही है। नदी तट का लगातार कटाव किसानों और पर्यावरण दोनों के लिए खतरा बनता जा रहा है। विशेषज्ञों की मानें तो एनीकट निर्माण के बाद कई स्थानों पर जल प्रवाह का दबाव बढ़ा है। पिचिंग सीमित दूरी तक होने से नदी किनारे की जमीन तेजी से कट रही है। हर साल लाखों पौधे लगाकर कटाव रोकने का दावा किया जाता है। लेकिन सुरक्षा और देखरेख के अभाव में अधिकांश पौधे बच नहीं पाते। कई पौधे बाढ़ में बह जाते हैं तो कई सूखकर खत्म हो जाते हैं।
कभी नदी किनारे अर्जुन और आम के घने पेड़ प्राकृतिक सुरक्षा कवच थे। अब वे या तो कट चुके हैं या कटाव की भेंट चढ़ चुके हैं। नदी के किनारे बसे किसानों की उपजाऊ जमीन लगातार कम हो रही है। पौधरोपण अभियान भी अब सवालों के घेरे में है। ग्रामीणों का कहना है कि पौधे लगाने के बाद उनकी निगरानी नहीं होती। ऐसे में इन्द्रावती को बचाने के लिए केवल पौधरोपण नहीं, स्थायी संरक्षण योजना की जरूरत महसूस की जा रही है।