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उफनते नाले ने रोकी अस्पताल की राह, लेकिन जिंदगी की रफ्तार नहीं थमी,चारपहिया वाहन बना प्रसूति कक्ष, अस्पताल पहुंचने से पहले गूंजी नवजात की पहली किलकारी,स्वास्थ्य कर्मियों, मितानिनों और ग्रामीणों की तत्परता से मां और नवजात दोनों सुरक्षित, गरियाबंद में सेवा और इंसानियत की मिसाल।

29 Jul 2026 | WEENEWS DESK | 918 views
उफनते नाले ने रोकी अस्पताल की राह, लेकिन जिंदगी की रफ्तार नहीं थमी,चारपहिया वाहन बना प्रसूति कक्ष, अस्पताल पहुंचने से पहले गूंजी नवजात की पहली किलकारी,स्वास्थ्य कर्मियों, मितानिनों और ग्रामीणों की तत्परता से मां और नवजात दोनों सुरक्षित, गरियाबंद में सेवा और इंसानियत की मिसाल।

गरियाबंद। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने जहां जिले में जनजीवन को प्रभावित कर दिया है, वहीं बुधवार को बारिश के बीच इंसानियत, सेवा और हौसले की ऐसी मिसाल देखने को मिली जिसने हर किसी का दिल जीत लिया। जिला मुख्यालय से महज आठ किलोमीटर दूर एक उफनते नाले ने गर्भवती महिला का अस्पताल पहुंचने का रास्ता रोक दिया। हालात इतने विकट हो गए कि अस्पताल पहुंचने से पहले ही सड़क पर खड़े चारपहिया वाहन को अस्थायी प्रसूति कक्ष बनाना पड़ा। स्वास्थ्य कर्मियों, मितानिनों और ग्रामीणों की तत्परता से महिला ने सुरक्षित रूप से एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया। मां और नवजात दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं।

जानकारी के अनुसार ग्राम भेजराडीही निवासी गर्भवती महिला को बुधवार सुबह करीब 10 बजे प्रसव पीड़ा शुरू होने पर परिजन तत्काल घुटकुनवापरा उप स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। वहां मौजूद महिला स्वास्थ्य कर्मचारी ने जांच के दौरान प्रसव को जोखिमपूर्ण मानते हुए बिना देर किए महिला को बेहतर उपचार के लिए जिला अस्पताल गरियाबंद रेफर कर दिया।

इसके बाद महिला को इक्को वाहन से जिला अस्पताल ले जाया जा रहा था, लेकिन घुटकुनवापरा के पास स्थित नाला लगातार बारिश के कारण उफान पर था। तेज बहाव और बढ़े जलस्तर के चलते वाहन आगे नहीं बढ़ सका। कुछ देर इंतजार करने के बाद स्वास्थ्य कर्मियों ने महिला को स्ट्रेचर से नाला पार कर दूसरी ओर खड़े वाहन तक पहुंचाने की तैयारी शुरू की।

इसी बीच प्रसव पीड़ा असहनीय हो गई और स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि महिला को आगे ले जाना संभव नहीं रहा। ऐसे में स्वास्थ्य कर्मियों ने बिना समय गंवाए इक्को वाहन के भीतर ही सुरक्षित प्रसव कराने का निर्णय लिया। कुछ ही देर में नवजात की पहली किलकारी गूंज उठी। मौके पर मौजूद मितानिनों, स्वास्थ्य कर्मचारियों और ग्रामीणों ने पूरी टीम भावना के साथ प्रसव कराया और मां-बच्चे की देखभाल में जुट गए।

सुरक्षित प्रसव के बाद मां और नवजात को वापस घुटकुनवापरा उप स्वास्थ्य केंद्र लाया गया, जहां दोनों की स्वास्थ्य जांच की गई। चिकित्सकीय निगरानी में आवश्यक उपचार और देखभाल जारी है। स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि मां और नवजात दोनों की हालत पूरी तरह सामान्य और सुरक्षित है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि स्वास्थ्य कर्मियों, मितानिनों और ग्रामीणों ने समय रहते सूझबूझ और तत्परता नहीं दिखाई होती तो स्थिति गंभीर हो सकती थी। यह घटना एक ओर स्वास्थ्य विभाग की त्वरित कार्यशैली और ग्रामीणों के सहयोग की मिसाल है, वहीं दूसरी ओर बारिश के मौसम में ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन और स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच की गंभीर चुनौतियों को भी उजागर करती है।

बारिश के बीच जब सड़कें थम गईं, तब सेवा, साहस और संवेदनशीलता ने एक नई जिंदगी को सुरक्षित दुनिया में आने का रास्ता बना दिया।


WEENEWS DESK
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