बिलासपुर शहर में नशे की गिरफ्त में आ चुके युवाओं को मुख्यधारा में लाने के लिए योग का सहारा लिया जा रहा है। मंगला के लोखंडी रोड स्थित शुद्धि नशा मुक्ति और पुनर्वास केंद्र में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर पांच दिवसीय योग शिविर का समापन हुआ। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य केवल कसरत करना नहीं था बल्कि योग के जरिए नशे की लत को जड़ से खत्म करना था। जमीन पर काम कर रहे विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि नशा छोड़ने में शारीरिक मजबूती के साथ साथ मानसिक शांति भी बहुत जरूरी है।
शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय के आयुष योग वैलनेस सेंटर ने इसका आयोजन किया। योग चिकित्सक डॉ श्वेता मार्को ने नशामुक्ति केंद्र में भर्ती युवाओं को योगासन प्राणायाम और ध्यान का नियमित अभ्यास कराया। उन्होंने बताया कि नशे से होने वाले भारी मानसिक तनाव और बैचेनी को सिर्फ ध्यान से दूर किया जा सकता है। योग से मन पूरी तरह शांत होता है और खुद पर नियंत्रण बढ़ता है जो किसी भी लत को हमेशा के लिए छोड़ने के लिए सबसे जरूरी है।

इस साल योग दिवस की थीम योगा फॉर हेल्दी एजिंग थी। इसी को मुख्य आधार बनाते हुए विशेषज्ञों ने शिविर में बताया कि अगर युवावस्था में नशे के कारण शरीर पूरी तरह खोखला हो जाएगा तो बुढ़ापा स्वस्थ कैसे रहेगा। स्वस्थ संतुलित और लंबी उम्र के लिए नशे से दूर रहना और योग को अपनी रोजमर्रा की दिनचर्या में शामिल करना बहुत जरूरी है।
शिविर के आखिरी दिन आयुर्वेद चिकित्सक डॉ सपना ताम्रकार ने व्याख्यान दिया। उन्होंने मरीजों को सीधे शब्दों में समझाया कि शराब और नशीले पदार्थ शरीर और दिमाग को अंदर से कैसे बर्बाद करते हैं। डॉ ताम्रकार ने सुबह जल्दी उठने सही खानपान शरीर की मालिश और सकारात्मक सोच रखने की स्पष्ट सलाह दी। उन्होंने बताया कि आयुर्वेद की जीवनशैली अपनाकर नशे से बहुत दूर रहा जा सकता है।
कार्यक्रम में मरीजों को नाश्ते में पौष्टिक अंकुरित अनाज और हर्बल काढ़े का वितरण किया गया। योग के फायदों वाले पम्पलेट भी दिए गए ताकि लोग जागरूक रहें। इस आयोजन में आयुर्वेद कॉलेज के द्वितीय वर्ष के छात्र छात्राओं ने अपनी जिम्मेदारी निभाई। शिविर को सफल बनाने में छात्र गौरव जायसवाल सुरभि पटेल ख्याति देवदास वार्ड बॉय खिलावन ध्रुव रोहित मांझी और नशामुक्ति केंद्र के कर्मचारियों की अहम भूमिका रही।